hajipur news. बड़ी संख्या में बौद्ध-जैन पर्यटक स्थलों को देखने वैशाली पहुंचे सैलानी, पूजा-अर्चना भी की

Published by : GOPAL KUMAR ROY Updated At : 09 Nov 2025 5:50 PM

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रविवार को कंबोडिया से आए सैकड़ों पर्यटकों के जत्थे ने वैशाली के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया

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वैशाली. भगवान बुद्ध की कर्मभूमि और भगवान महावीर की जन्मस्थली वैशाली इन दिनों विदेशी सैलानियों से गुलजार है. प्राचीन इतिहास, धर्म और संस्कृति का संगम यह नगर एशियाई देशों के पर्यटकों के लिए आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन गया है. यहां की पवित्र भूमि, बौद्ध धरोहरें और जैन आस्थाएं सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं.

देश के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों में शुमार वैशाली में प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं. हालांकि सालभर सैलानियों का आना-जाना बना रहता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च तक के मौसम में यहां सर्वाधिक भीड़ देखी जाती है. इस दौरान बुद्ध समयक दर्शन संग्रहालय, राजा विशाल का गढ़, विश्व शांति स्तूप, रेलिक स्तूप, कोल्हुआ स्थित अशोक स्तंभ और बासोकुंड स्थित भगवान महावीर की जन्मस्थली जैसे दर्शनीय स्थलों पर भारी चहल-पहल रहती है.

व्यवसायियों के चेहरे पर आयी रौनक

रविवार को कंबोडिया से आए सैकड़ों पर्यटकों के जत्थे ने वैशाली के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया. कंबोडिया मंदिर के भंते के नेतृत्व में उन्होंने रेलिक स्तूप पर विशेष पूजा-अर्चना की. यह वही पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध की अस्थि कलश प्राप्त हुई थी. भंते ने पर्यटकों को वैशाली के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

इन दिनों जापान, श्रीलंका, वियतनाम, कंबोडिया और थाईलैंड सहित कई देशों से बौद्ध धर्मावलंबी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं. पर्यटकों की बढ़ती आमद से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है. होटल, गाइड, ऑटो चालकों, दुकानदारों और अन्य व्यवसायियों के चेहरे पर रौनक लौट आई है.

इस साल 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है पर्यटकों की संख्या

पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष विदेशी सैलानियों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है. अधिकारियों का कहना है कि पर्यटकों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और दर्शनीय स्थलों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.

वैशाली का यह पर्यटन मौसम न केवल जिले की पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक पटल पर नई पहचान दिला रहा है.

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