hajipur news. सीएम ने 16 साल पहले की घोषणा, लेकिन आज तक नहीं बनी सीड प्रोसेसिंग यूनिट

Published by : RAHUL RAY Updated At : 12 Jan 2026 6:06 PM

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नगर के चकवारा में सीड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना होनी थी. सरकार ने इसके लिए 50 लाख रुपये की राशि भी आवंटित कर दी थी

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हाजीपुर. फूलगोभी बीज उत्पादन के लिए देश भर में मशहूर हाजीपुर में आज तक सीड प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण नहीं हो सका है. शिलान्यास के 15 साल बीत जाने के बाद भी बीज प्रसंस्करण इकाई की स्थापना नहीं होने से यहां के फूलगोभी बीज उत्पादक किसान मायूस हैं. नगर के चकवारा में सीड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना होनी थी. सरकार ने इसके लिए 50 लाख रुपये की राशि भी आवंटित कर दी थी. भवन निर्माण विभाग से नक्शा भी पास हो गया था. उसके बाद शिलान्यास भी हो गया, लेकिन आज तक यह योजना आकार नहीं ले सकी है.

16 जनवरी 2010 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चकवारा आकर स्वयं इसकी घोषणा की थी. मौके पर ही उन्होंने कृषि उत्पादन आयुक्त व राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति को सीड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना का आदेश दिया था. इसके बाद नवंबर 2011 में राज्य के तत्कालीन पशुपालन मंत्री गिरिराज सिंह तथा कैबिनेट मंत्री अवधेश प्रसाद कुशवाहा ने इसका शिलान्यास किया था. 29 नवंबर 2011 को चकवारा में फूलगोभी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कृषि विभाग के सचिव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे थे. तब से हाजीपुर के बीज उत्पादक किसान इस बीज प्रक्षेत्र में प्रोसेसिंग यूनिट के स्थापित होने का इंतजार कर रहे हैं.

फूलगोभी बीज के लिए देशभर में चर्चित है चकवारा

नगर का चकवारा, लोदीपुरी, मीनापुर व इसके आसपास का इलाका फूलगोभी बीज उत्पादन के लिए देश भर में प्रसिद्ध है. अगात किस्म के फूलगोभी बीज उत्पादन के लिए चकवारा की पहचान दूर-दूर तक फैली है. चकवारा स्थित अन्नदाता कृषि क्लब के सचिव संजीव कुमार बताते हैं कि यहां के किसानों द्वारा उत्पादित बीज से बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने अग्रिम प्रजाति विकसित की. फूलगोभी बीज के मामले में सबौर अग्रिम वैरायटी को सेंट्रल वैरायटी रिलीज कमेटी ने भी अनुमोदित किया है.

फूलगोभी बीज की मात्र एक प्रजाति ही बिहार में हुई विकसित

बिहार में फूलगोभी बीज की मात्र एक ही प्रजाति विकसित हुई है, जो सबौर अग्रिम वैरायटी के नाम से जानी जाती है. यहां के बीज उत्पादक किसानों का कहना है कि सीड प्रोसेसिंग यूनिट लग जाने से बीज की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही प्रसंस्करण की आधुनिक सुविधाएं भी प्राप्त होंगी. राकेश कुमार मुन्ना, राजीव रंजन, प्रदीप कुशवाहा, रवि कुमार चौधरी, द्वारिका सिंह समेत अन्य किसानों ने बीज प्रसंस्करण इकाई का यथाशीघ्र निर्माण कराने की मांग की है.

राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाले युवा किसान संजीव कुमार ने बताया कि चकवारा में जिस जमीन पर सीड प्रोसेसिंग यूनिट का शिलान्यास हुआ था, वह आगे चलकर विवादित हो गई. इसके बाद नगर के हरिवंशपुर में जिला निबंधन कार्यालय के समीप जमीन की व्यवस्था की गई, लेकिन वहां भी पैमाइश के बाद पेंच फंस गया और योजना अधर में रह गई. इसके बाद वर्ष 2024 में तत्कालीन जिलाधिकारी यशपाल मीणा के निर्देश पर सदर प्रखंड के सेंदुआरी में बीज प्रसंस्करण इकाई की स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई. जमीन तो मिल गई, लेकिन इसका निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है.

क्या कहते हैं अधिकारी

सीड प्रोसेसिंग यूनिट हाजीपुर के चकवारा में स्थापित की जानी थी. वहां जमीन की समस्या के कारण इसके निर्माण का कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था. वर्ष 2024 में जिलाधिकारी की पहल से सदर प्रखंड के सेंदुआरी में जमीन की व्यवस्था हुई और आगे की प्रक्रिया शुरू की गयी थी, लेकिन, चकवारा के बीज उत्पादक चाहते हैं कि प्रोसेसिंग यूनिट चकवारा में ही स्थापित की जाये. इसके कारण फिलहाल निर्माण कार्य रुका हुआ है.

प्रशांत कुमार झा, जिला उद्यान पदाधिकारीB

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