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hajipur news. किसी वस्तु के बारे में निश्चित ज्ञान को ही शोध कहते हैं : डाॅ नवल

Updated at : 14 May 2025 11:21 PM (IST)
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hajipur news. किसी वस्तु के बारे में निश्चित ज्ञान को ही शोध कहते हैं : डाॅ नवल

देवचंद महाविद्यालय में ‘रिसर्च पेपर राइटिंग’ पर हुई संगोष्ठी, डीसी कालेज में हुआ रिसर्च पेपर राइटिंग पर संगोष्ठी, कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो रत्नेश्वर मिश्रा शामिल हुए

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हाजीपुर. देवचंद महाविद्यालय में आइक्यूएसी एवं रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को ‘रिसर्च पेपर राइटिंग’ (शोधपत्र लेखन) विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. रत्नेश्वर मिश्रा शामिल हुए. अनुसंधान और नवाचारों का विकास उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रसार के आवश्यक घटक है, इन्हीं व्यापक उद्देश्यों के साथ देवचंद महाविद्यालय द्वारा यह सशक्त पहल की गई. आइक्यूएसी के समन्वयक एवं इतिहास विभाग के अध्यक्ष डा. नवल कुमार ने कहा कि किसी वस्तु के बारे में निश्चित ज्ञान को ही शोध कहते हैं. यह एक व्यवस्थित और तर्कसंगत प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी विषय, समस्या या घटना के बारे में नई जानकारी प्राप्त की जाती है. सत्य को खोजा जाता है या पहले से उपलब्ध ज्ञान का पुनः मूल्यांकन किया जाता है. प्रो. रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि शोध में यथासंभव सत्य तक पहुंचने का प्रयत्न होना चाहिए. शोध को मात्र जीविकोपार्जन की सीढी न मानकर जिज्ञासु भाव से प्रवृत्त होना चाहिए. इन्होंने विस्तारपूर्वक साहित्य समीक्षा, संदर्भ ग्रंथ सूची, स्रोत सामग्री, शीर्षक निर्धारण, प्रश्नावली निर्माण, भूमिका एवं अध्याय लेखन इत्यादि के विषय में उपस्थित शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को जानकारी प्रदान दिया. अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. तारकेश्वर पंडित ने कहा कि वर्तमान शोध का गिरता स्तर चिंता का विषय है. शोध पर व्यावसायिकता हावी नहीं होनी चाहिए. इन्होंने शोध के लिए प्रभावशाली भाषा को एक महत्वपूर्ण घटक बताया. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ‘रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल’ के संयोजक एवं हिंदी के विभागाध्यक्ष डा. आलोक कुमार सिंह ने कहा कि शोध के क्षेत्र में किसी शिक्षक या शोधार्थी को तभी प्रवेश करना चाहिए, जब उनमें अकादमिक शुचिता बनाए रखने का नैतिक संकल्प हो. कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. सत्यप्रकाश कुमार ने किया. इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों में प्रो. आतिफ रब्बानी, डा. अमरेंद्र शर्मा, डा. सुल्तान अकबर खान, डा. अवनीश मिश्र, डा. मो अबुल्लैस, प्रो. मंतशा, डा. रिंकू कुमारी, डा. नीतू कुमारी आदि उपस्थित रहे. इनके अलावा शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Shashi Kant Kumar

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By Shashi Kant Kumar

Shashi Kant Kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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