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बिहार के छात्रों के हित में चार वर्षीय स्नातक कोर्स, राज्यपाल बोले- नई शिक्षा नीति पर गलतफहमी पाल रहे कुछ लोग

Updated at : 27 Jun 2023 11:48 PM (IST)
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बिहार के छात्रों के हित में चार वर्षीय स्नातक कोर्स, राज्यपाल बोले- नई शिक्षा नीति पर गलतफहमी पाल रहे कुछ लोग

राज्यपाल ने कहा कि नयी शिक्षा नीति लागू करने से कुछ लोगों को आपत्ति है. किसी के मन में गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. कुछ लोग हड़काते रहते हैं. हड़काने वालों में कोई दम नहीं है. इस नीति को लेकर उनको समझने व जानने की जरूरत है.

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बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंगलवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 युवा पीढ़ी के हित में है. इसके लिए युवाओं को एकजुट होना होगा. बगैर किसी अधिकारी व मंत्री का नाम लिये राज्यपाल ने कहा कि नयी शिक्षा नीति लागू करने से कुछ लोगों को आपत्ति है. किसी के मन में गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. कुछ लोग हड़काते रहते हैं. हड़काने वालों में कोई दम नहीं है. इस नीति को लेकर उनको समझने व जानने की जरूरत है.

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के हमारी युवा पीढ़ी के हित में है. आज पूरा देश एक नये तरीके से सोच रहा है और बिहार को इसमें पीछे नहीं रहना चाहिए. सेमेस्टर सिस्टम एवं च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम पर आधारित चार वर्षीय स्नातक कोर्स की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बिहार के छात्रों के हित में है. इसके तहत छात्र-छात्राओं को मात्र स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के लिए तीन वर्षों तक ही अध्ययन करना होगा. जो छात्र-छात्राएं उच्चतर शिक्षा हासिल करना चाहते हों अथवा विदेशों में पढ़ाई करना चाहते हैं अथवा अन्य विश्वविद्यालय, जहां उच्चतर शिक्षा के लिए स्नातक स्तर पर चार वर्ष की शिक्षा आवश्यक हो, वहां प्रवेश पाना चाहते हों, वे अपनी इच्छानुसार चौथे वर्ष की पढ़ाई का विकल्प चुन सकते हैं.

राज्यपाल ने बताया कि चार वर्ष का स्नातक कोर्स कर लेने के बाद छात्र-छात्राओं को स्नातकोत्तर के लिए एक वर्ष की ही पढ़ाई करनी होगी. इसके तहत हर छः महीने के बाद परीक्षा होगी और शिक्षक व विद्यार्थियों का लगातार मूल्यांकन होगा. उन्होंने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम पूरे देश में लागू है. राज्यपाल ने कहा कि चार वर्षीय स्नातक कोर्स के तहत एक वर्ष की पढ़ाई के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे वर्ष की पढ़ाई के बाद डिप्लोमा और तीसरे वर्ष की पढ़ाई के बाद डिग्री दिये जाने का प्रावधान है. वर्तमान में लागू तीन वर्षीय स्नातक कोर्स में ऐसी व्यवस्था नहीं हैं.

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