हथुआ जंक्शन से लाखों का राजस्व, फिर भी यात्री सुविधाएं नदारद, ट्रेनों के ठहराव का भी रिकॉर्ड नहीं

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हथुआ जंक्शन के रेक पॉइंट पर खड़ी माल गाड़ी

मीरगंज स्थित हथुआ रेलवे जंक्शन से सालाना लाखों रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दो वित्तीय वर्षों में जंक्शन से रेलवे को 90 लाख रुपये से अधिक का टिकट राजस्व मिला है. इसके बावजूद, स्टेशन पर केवल एक प्लेटफॉर्म है और लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव का भी कोई रिकॉर्ड नहीं है.

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Gopalganj News: मीरगंज स्थित हथुआ रेलवे जंक्शन से सालाना लाखों रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद यहां यात्री सुविधाओं का अभाव है. वर्ष 2005 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने हथुआ-भटनी रेलखंड की नींव रखी थी. इसी दौरान अंग्रेजों के जमाने के हथुआ स्टेशन को जंक्शन का दर्जा मिला था. जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब स्टेशन का कायाकल्प होगा और इसका दायरा बढ़ने के साथ यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा. लेकिन करीब 20 साल बीत जाने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है.

हथुआ जंक्शन का न तो दायरा बढ़ा और न ही यात्री सुविधाओं का विस्तार हुआ. अब मीरगंज के व्यवसायी व समाजसेवी प्रवीण कुमार गुप्ता द्वारा रेलवे से आरटीआई के माध्यम से मांगी गयी जानकारी में जंक्शन की स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये हैं. रेलवे की ओर से उपलब्ध करायी गयी जानकारी ने यात्री सुविधाओं और स्टेशन के विकास को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं.

दो साल में रेलवे को मिले 90 लाख रुपये से अधिक

आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार हथुआ जंक्शन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 43,99,460 रुपये का टिकट राजस्व अर्जित किया. वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 46,25,480 रुपये का टिकट राजस्व प्राप्त हुआ. इस तरह दो वित्तीय वर्षों में हथुआ जंक्शन से रेलवे को कुल 90,24,940 रुपये का टिकट राजस्व मिला.

आंकड़ों के अनुसार जंक्शन से प्रतिदिन औसतन 465 से 518 अनारक्षित टिकटों की बिक्री होती है. इसके अलावा बड़ी संख्या में यात्री यहां से ट्रेनों में सफर करते हैं. इसके बावजूद स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार की रफ्तार काफी धीमी है.

एक ही प्लेटफॉर्म के भरोसे अप और डाउन ट्रेनें

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार हथुआ जंक्शन पर दोनों दिशाओं की ट्रेनों के संचालन के लिए महज एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध है. अप और डाउन ट्रेनों के ठहराव और संचालन के लिए यात्रियों को इसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना पड़ता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जंक्शन बनने के करीब दो दशक बाद भी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की संख्या नहीं बढ़ायी गयी है. जबकि यहां से लगातार यात्रियों का आवागमन होता है और रेलवे को हर साल लाखों रुपये का राजस्व भी प्राप्त होता है. स्टेशन पर एक अतिरिक्त प्वाइंट भी बनाया गया है, लेकिन इसके बावजूद यात्री सुविधाओं का अपेक्षित विस्तार नहीं हो सका है.

ट्रेनों के ठहराव का रिकॉर्ड भी नहीं

आरटीआई के माध्यम से लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव और उनसे संबंधित जानकारी मांगी गयी थी. रेलवे से मिले जवाब के बाद इस मुद्दे पर भी सवाल खड़े हुए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हथुआ जंक्शन को जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव की उम्मीद थी, लेकिन अब तक यात्रियों की जरूरत के अनुरूप ट्रेनों का ठहराव नहीं बढ़ सका है.

सुविधाओं के विस्तार की उठ रही मांग

स्थानीय व्यवसायियों और यात्रियों का कहना है कि हथुआ जंक्शन से रेलवे को हर साल लाखों रुपये का राजस्व मिलता है. इसके बावजूद स्टेशन पर बुनियादी यात्री सुविधाओं और ट्रेनों के ठहराव का विस्तार नहीं होना चिंता का विषय है. लोगों ने रेलवे से स्टेशन पर अतिरिक्त प्लेटफॉर्म बनाने, यात्री सुविधाओं का विस्तार करने और यात्रियों की जरूरत के अनुसार लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव देने की मांग की है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि हथुआ जंक्शन को विकसित करने से मीरगंज और आसपास के कई प्रखंडों के यात्रियों को लाभ मिलेगा. साथ ही क्षेत्र के व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.

स्थानीय लोगों में बढ़ रहा आक्रोश

हथुआ जंक्शन से लगातार राजस्व मिलने के बावजूद सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. लोगों का कहना है कि करीब 20 साल पहले जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद विकास की जो उम्मीद जगी थी, वह अब तक पूरी नहीं हो सकी है. आरटीआई से सामने आये आंकड़ों ने एक बार फिर रेलवे की कार्यप्रणाली और स्टेशन के विकास को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं.

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प्रशांत पाठक

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By प्रशांत पाठक

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