CBSE 12वीं के प्राप्तांक से असंतुष्ट छात्र करा सकते हैं री-वैल्यूएशन, एक नंबर बढ़ने पर भी लौटेगी पूरी फीस

Published by : Vivek Pandey Updated At : 03 Jun 2026 9:15 AM

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Gopalganj News: री-वैल्यूएशन में अंक बढ़ भी सकते हैं और घट भी, अनियमितता मिलने पर अधिकारियों व एजेंसियों पर होगी कार्रवाई

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Gopalganj News: (विकास दुबे) CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद अंकों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) और री-वैल्यूएशन को लेकर छात्रों एवं अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है. बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं और उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने की तैयारी में जुट गए हैं.

इसी बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त अंकों से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं. यदि री-वैल्यूएशन के बाद किसी छात्र के अंकों में एक नंबर की भी बढ़ोतरी होती है तो आवेदन के लिए जमा की गई पूरी फीस वापस कर दी जाएगी. बोर्ड के इस फैसले से छात्रों में उम्मीद जगी है कि मूल्यांकन में हुई संभावित त्रुटियों को सुधारा जा सकेगा.

री-वैल्यूएशन में अंक बढ़ने के साथ घट भी सकते हैं

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि री-वैल्यूएशन केवल अंक बढ़ाने की प्रक्रिया नहीं है. उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच के दौरान यदि छात्र अधिक अंक का हकदार पाया जाता है तो अंक बढ़ाए जाएंगे. वहीं यदि यह पाया जाता है कि पहले अपेक्षा से अधिक अंक दिए गए थे तो अंक घटाए भी जा सकते हैं. री-वैल्यूएशन के बाद जारी अंक ही अंतिम और मान्य माने जाएंगे. बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों को आवेदन से पहले नियमों को ध्यानपूर्वक समझने की सलाह दी है.

स्कैन कॉपी लेने वाले छात्र ही कर सकेंगे आवेदन

सीबीएसई के निर्देशानुसार केवल वही छात्र-छात्राएं री-वैल्यूएशन या वेरिफिकेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने पहले अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी या फोटोकॉपी प्राप्त कर ली है. पोस्ट रिजल्ट सर्विसेज के तहत बोर्ड विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल कॉपी उपलब्ध करा रहा है, ताकि वे अपने उत्तरों और प्राप्त अंकों का मिलान कर सकें.

पोस्ट रिजल्ट पोर्टल से होगी आवेदन प्रक्रिया

री-वैल्यूएशन के लिए छात्रों को सीबीएसई के पोस्ट रिजल्ट पोर्टल पर जाकर रोल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी की सहायता से लॉगिन करना होगा. इसके बाद वे वेरिफिकेशन, री-वैल्यूएशन अथवा दोनों विकल्पों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं.

री-वैल्यूएशन के लिए संबंधित विषय के उन प्रश्नों का चयन करना होगा, जिनकी दोबारा जांच करानी है. निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करने के बाद आवेदन प्रक्रिया पूरी होगी. आवेदन जमा करने के बाद छात्रों को कन्फर्मेशन पेज और आवेदन आईडी सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है.

तकनीकी दिक्कत से देर से शुरू हुई प्रक्रिया

सीबीएसई पहले 26 मई से री-वैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू करने वाला था. हालांकि पोर्टल में तकनीकी समस्या आने के कारण निर्धारित तिथि पर आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी. बाद में तकनीकी खामियों को दूर कर आवेदन लिंक सक्रिय किया गया. इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र जानकारी जुटाने और आवेदन करने में जुट गए.

उत्तर पुस्तिकाओं की मांग ने बढ़ाई चिंता

इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मंगाई है. बोर्ड के अनुसार लाखों विद्यार्थियों ने डिजिटल कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में आवेदन इस बात का संकेत है कि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं.

स्कैन कॉपी मिलने के बाद उठे कई सवाल

उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मिलने के बाद कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. कुछ छात्रों का दावा है कि सही उत्तर लिखने के बावजूद उन्हें अपेक्षित अंक नहीं मिले. कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि स्टेप-वाइज मार्किंग नहीं की गई, जबकि वस्तुनिष्ठ प्रश्नों (एमसीक्यू) में भी बिना स्पष्ट कारण अंक काट दिए गए.

सोशल मीडिया पर भी कई छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के आधार पर मूल्यांकन में गड़बड़ी होने का दावा किया है. कुछ मामलों में मूल्यांकन में लापरवाही बरतने के आरोप भी लगाए गए हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

ओएसएम प्रणाली पर विवाद, विभाग ने मांगी रिपोर्ट

सीबीएसई ने इस वर्ष लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) के माध्यम से कराया था, जबकि कुछ कॉपियों की जांच पारंपरिक तरीके से की गई. परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रणाली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

स्कैन कॉपियां सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया. कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिका बदलने, स्टेप-वाइज अंक नहीं देने और एमसीक्यू में अनावश्यक अंक काटे जाने जैसे आरोप लगाए हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बढ़ती शिकायतों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लिया है.

विभाग ने मूल्यांकन कार्य से जुड़े ठेका और पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट तलब की है. अधिकारियों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा की जा रही है. यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

अब जिले सहित देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों की निगाहें री-वैल्यूएशन के परिणाम और शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. छात्रों को उम्मीद है कि दोबारा जांच की प्रक्रिया से उन्हें उनके वास्तविक अंक मिलेंगे और मूल्यांकन को लेकर उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब भी मिलेगा.

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लेखक के बारे में

By Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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