गोपालगंज: पंचदेवरी की कृतिका पांडेय बनीं भारत सरकार में पेटेंट अफसर, ग्रुप-ए राजपत्रित अधिकारी के रूप में चयन

Author Ajit dubey
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अपने माता-पिता के साथ कृतिका पांडे

अपने माता-पिता के साथ कृतिका पांडे

Gopalganj News: पंचदेवरी की कृतिका पांडेय ने भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में पेटेंट अफसर बनकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उनका चयन ग्रुप-ए राजपत्रित अधिकारी के रूप में हुआ है.

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Gopalganj News: गोपालगंज जिले के पंचदेवरी प्रखंड के गहनी गांव निवासी शिक्षक सतीश दुबे की भांजी कृतिका पांडेय ने यह साबित कर दिखाया है कि ऊंची सोच, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ मेहनत की जाये, तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है. उसने अपनी अद्भुत प्रतिभा के बल पर ग्रुप-ए राजपत्रित अधिकारी (Class-1 Gazetted Officer) बनने का गौरव हासिल किया है. कृतिका के पिता अनिल पांडेय भारतीय रेलवे में चीफ लोको इंस्पेक्टर के पद से गरिमामय ढंग से रिटायर्ड हैं, जबकि उनकी माता उषा पांडेय एक कुशल गृहिणी हैं.

डीआरडीओ में कर चुकी हैं काम

बचपन से ही अत्यंत मेधावी रही कृतिका ने गोरखपुर से अपनी मैट्रिक और इंटरमीडिएट की प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से बीटेक (B.Tech) तथा पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठित भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, शिबपुर से एमटेक (M.Tech) की उच्च डिग्री हासिल की. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उसने नयी दिल्ली स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में जूनियर रिसर्च फेलो (JRF) के रूप में भी देश सेवा का कार्य किया.

परिजनों व भाइयों का मिला सहयोग

फिलहाल, कृतिका नयी दिल्ली में रहकर यूपीएससी (UPSC) के तहत आईईएस (IES) की उच्च स्तरीय तैयारी में पूरी शिद्दत से जुटी थीं, इसी बीच उनका चयन भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत पेटेंट अफसर के रूप में हो गया. कृतिका का पूरा परिवार उच्च शिक्षित है. उनके बड़े भाई ऋषभ पांडेय वर्तमान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) में एक जिम्मेदार अधिकारी हैं, जबकि उनका छोटा भाई शिवांशु पांडेय बेंगलुरु की एक विख्यात आईटी कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत है.

मार्गदर्शन को बताया अपनी संजीवनी बूटी

अपनी इस शानदार और गौरवशाली सफलता पर कृतिका ने कहा कि पूर्व में एसडीओ रहे उनके पूजनीय नाना स्व विष्णुदेव दुबे, मामा सतीश दुबे, सुनील दुबे और पंकज दुबे से समय-समय पर मिला कुशल मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन उनके लिए संजीवनी बूटी साबित हुआ. उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने नाना के आशीर्वाद, माता-पिता के त्याग, मामाओं के दिशा-निर्देश, भाइयों के अनवरत सहयोग और अपने गुरुजनों की शिक्षा को दिया है. कृतिका की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर पंचदेवरी के स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने बधाई दी है.

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