सुनने को नहीं मिलता प्रवासी पक्षियों का कलरव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :24 Jan 2017 6:12 AM (IST)
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इस वर्ष कम संख्या में पहुंचे प्रवासी मेहमान सूखने लगे ताल तिलैया मेहमानों का आना कम गोपालगंज : इस मौसम में प्रवासी पक्षियों के कलरव से जलाशय और चंवर गूंजते थे. इस वर्ष भी प्रवासी मेहमान जिले में पहुंचे हैं, लेकिन अब न तो उनकी झुंड देखने को मिलती है और न ही उनके कलरव […]
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इस वर्ष कम संख्या में पहुंचे प्रवासी मेहमान
सूखने लगे ताल तिलैया मेहमानों का आना कम
गोपालगंज : इस मौसम में प्रवासी पक्षियों के कलरव से जलाशय और चंवर गूंजते थे. इस वर्ष भी प्रवासी मेहमान जिले में पहुंचे हैं, लेकिन अब न तो उनकी झुंड देखने को मिलती है और न ही उनके कलरव की गूंज सुनाई देती है. इस बार मेहमान पक्षी जिले के इन जलाशयों तक सिमट कर रह गये हैं. गौरतलब है कि सिंगही, घोघिया, रामपुर, काशी टेंगराही, सलेमपुर, भागर जलाशय, गौसियां सहित गंडक की तलहटी में साइबेरियन पक्षियों की झुंड पहुंचती थी. यहां आनेवाले पक्षियों में लालसर, दिगवच, डुमर, कौवेल सहित कई मुख्य पक्षियां होती थी. धीरे – धीरे ताल तिलैया और चंवर सूखते चले गये और इन मेहमानों का आना भी कम होने लगा. नवंबर से फरवरी-मार्च तक जो जलाशय और चंवर इनके कलरव से खिलते थे वहां आज वीरानगी है. इस बार साइबेरियन पक्षियों की झुंड गंडक की तलहटी तक सिमट कर रह गयी है. इन पक्षियों को देखनेवालों की भीड़ आज-कल गंडक की तलहटी तक पहुंच रही है.
प्रवासी पक्षियों पर है कातिलाना नजर : मेहमान बन कर आये प्रवासी पक्षी कभी प्रकृति के सौंदर्य को बढ़ानेवाले माने जाते थे और जिलावासी उनके सुरक्षा के लिए बेचैन रहते थे. अब इन प्रवासी पक्षियों पर बहेलियों की कातिलाना नजर है. मांस के शौकीन रइसजादे इन पक्षियों की जहां मुहमांगी दाम अदा कर रहे हैं वहीं दाना डाल कर इन पक्षियों को जाल में फंसाया जा रहा है. एक तो इस बार पक्षियों की संख्या कम है वहीं दूसरी ओर इनका शिकार धड़ल्ले से हो रहा है.
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