कटाव बेकाबू, कई घर नदी में समाये
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Sep 2016 7:44 AM (IST)
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गंडक नदी के कटाव से स्थिति दिनों दिन भयावह होती जा रही है. कालामटिहिनिया पंचायत का वार्ड चार नदी में समा चुका है. नदी का कटाव अब वार्ड पांच और छह में हो रहा है. लोग अपने घर को खाली करने लगे हैं. सासामुसा : कुचायकोट प्रखंड की कालामटिहिनिया तथा विशंभरपुर पंचायतों में गंडक नदी […]
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गंडक नदी के कटाव से स्थिति दिनों दिन भयावह होती जा रही है. कालामटिहिनिया पंचायत का वार्ड चार नदी में समा चुका है. नदी का कटाव अब वार्ड पांच और छह में हो रहा है. लोग अपने घर को खाली करने लगे हैं.
सासामुसा : कुचायकोट प्रखंड की कालामटिहिनिया तथा विशंभरपुर पंचायतों में गंडक नदी का कटाव बेकाबू हो चुका है.
विशंभरपुर हाइस्कूल के नवनिर्मित भवन पर भी कटाव का खतरा मंडराने लगा है. अगले 24 घंटे में नदी का कटाव जारी रहा, तो स्कूल का नया भवन नदी में समा जायेगा. सामुदायिक भवन में चल रहे कालामटिहिनिया मध्य विद्यालय को खाली करा कर रूप छाप में शिफ्ट कराया गया. कटाव के कारण इस भवन के भी नदी में समा जाने की आशंका बनी है. गंडक नदी तेजी से गांव को काटने में लगी है. कालामटिहिनिया पंचायत का वार्ड चार नदी में समा चुका है. पांच और छह पर कटाव तेज हो गया है. कटाव के कारण बिंदा यादव, कमला यादव, पलटू ठाकुर, पारस ठाकुर, हरिराम, दीनानाथ यादव, सुदामा यादव, मुख्तार साह, जवाहर साह, रमावती देवी समेत एक दर्जन लोगों के घर पिछले 24 घंटे में नदी में समा चुके हैं. नदी के कटाव से लोग अपने घरों को तोड़ कर सामान सुरक्षित करने के प्रयास में हैं. लोग सामान को लेकर सुरक्षित स्थल की तलाश में जुटे हैं. फिलहाल पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है.
रास्ता नहीं होने से बढ़ीं मुश्किलें
कटाव से जहां कालामटिहिनिया और विशंभरपुर में अफरा-तफरी मची हुई है, वहीं लोग घरों को तोड़ कर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. इनके लिए सबसे बड़ा संकट रास्ता का हो रहा है. सिपाया से विशंभरपुर, अहिरौली तक निकलने के लिए सभी प्रमुख सड़कें टूट चुकी हैं. इसके कारण न तो ट्रैक्टर निकल पा रहा है और न ही बैलगाड़ी. खेतों में पानी भरा हुआ है. पिछली 18 जुलाई को आयी बाढ़ के कारण यहां की स्थिति आज भी गंभीर बनी हुई है
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डेढ़ सौ एकड़ की फसल नदी में समायी
गंडक नदी के कटाव से पिछले एक सप्ताह के भीतर लगभग डेढ़ सौ एकड़ फसल नदी के गर्भ में समा चुकी है.नदी का कटाव गन्ने के खेतों में जारी है. लहलहाती फसल नदी में समाने से किसानों की नींद हराम हो चुकी है. नदी पूरी तरह से दोनों पंचायतों के लोगों को सड़क पर लाकर छोड़ दिया है. अपने घरों को तोड़ कर सामान सुरक्षित करने में जुटे हैं लोग. इनके लिए सबसे बड़ा संकट रास्ता का हो रहा है. बाढ़पीिड़तों को काफी परेशािनयांे का सामना करना पड़ रहा है.
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