चुनाव की धुन में गुम हुआ किसानों का गम
चुनाव की धुन में गुम हुआ किसानों का गम .. फसल को काट कर पशुओं को खिलाने को मजबूर किसानफोटो-27संवाददाता, कटेयाचुनाव के इस मौसम में नेता से लेकर अधिकारी तक चुनावी हंगामें में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें किसानों का दर्द नहीं दिख रहा है. अपनी छह माह की मेहनत बरबाद होते देख किसान जहां […]
चुनाव की धुन में गुम हुआ किसानों का गम .. फसल को काट कर पशुओं को खिलाने को मजबूर किसानफोटो-27संवाददाता, कटेयाचुनाव के इस मौसम में नेता से लेकर अधिकारी तक चुनावी हंगामें में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें किसानों का दर्द नहीं दिख रहा है. अपनी छह माह की मेहनत बरबाद होते देख किसान जहां आंसू बहा रहे हैं, वहीं जनप्रतिनिधि वोट की जुगाड़ में है़. बता दें कि पहले से ही किसानों की हालत रबी फसल ने खस्ता कर दी थी और अब बची-खुची कसर खरीफ फसल ने निकाल दी है. कटेया प्रखंड की सर्वाधिक जनसंख्या कृषि पर आधारित है. कृषि से ही उनका पूरा कार्य संपन्न होता है. दोनों फसलों के बरबाद होने के बाद किसानों के सामने समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं. बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाई तथा बिटिया की सगाई सब पर फसल की मार भारी पड़ गयी है. किसान अपने खेतों की बार-बार सिंचाई करके भी मनोकूल फसल न देख कर जहां उनकी कटाई कर रहे है, वहीं इस बात के भय से भी कांप रहे हैं कि अगली फसल का क्या होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि धान की फसल के वक्त होनेवाली बारिश से ही गेहूं की फसल का भविष्य तय होता है. इस वर्ष बारिश न होने से गेहूं पर संकट मंडरा रहा है. बता दें कि गेहूं की फसल में दाने नहीं लगने से कटेया प्रखंड के खुरहुरिया गांव के किसान रामाधार साह की मौत हृदय गति के रुक जाने से हो गयी थी. आज भी रामाधार की मौत को लोग भूले नहीं हैं.
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