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मृत बच्चे की तलाश में छापेमारी कर रही पुलिस

Updated at : 14 Nov 2019 2:11 AM (IST)
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मृत बच्चे की तलाश में छापेमारी कर रही पुलिस

सुरेश कुमार राय, भोरे : जिसने जन्म के बाद पूरी तरह से दुनिया नहीं देखी और दुनिया को अलविदा कह गया, उसकी मौत के 17 साल बाद न सिर्फ उसे एक अापराधिक कांड में आरोपित ही बनाया गया, बल्कि पुलिस उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार छापेमारी कर रही है. परिजनों के द्वारा सरकार की ओर […]

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सुरेश कुमार राय, भोरे : जिसने जन्म के बाद पूरी तरह से दुनिया नहीं देखी और दुनिया को अलविदा कह गया, उसकी मौत के 17 साल बाद न सिर्फ उसे एक अापराधिक कांड में आरोपित ही बनाया गया, बल्कि पुलिस उसकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार छापेमारी कर रही है.

परिजनों के द्वारा सरकार की ओर से जारी डेथ सर्टिफिकेट भी पुलिस को उपलब्ध करा दिया गया है. डेथ सर्टिफिकेट को पुलिस मानने को तैयार नहीं है. थक हार कर अब इस मामले में परिजनों ने भोरे पुलिस के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अपील कर न्याय की अपील परिजनों ने की है.
बता दें कि इमिलिया गांव निवासी राम प्रसन्न भगत के आवेदन पर कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में भोरे थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, जिसमे महेंद्र सिंह, उनके पुत्र सुनील कुमार सिंह, सुधीर कुमार सिंह सहित आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. तब इस कांड के अनुसंधानकर्ता एएसआइ संजय कमार सिंह थे. उनका तबादले के बाद कांड का अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी नवल किशोर यादव को बना दिया गया.
डेथ सर्टिफिकेट को झूठा मान रही पुलिस
इस कांड में आरोपित संख्या चार सुधीर कुमार सिंह की मौत पांच फरवरी, 2002 को दो वर्ष की उम्र में ही विजयीपुर थाने के अहियापुर गांव में हो गयी थी, जिसे 2018 के मामले में आरोपित बना दिया गया. इधर, कांड के अनुसंधानकर्ता को सुधीर कुमार सिंह का मृत्यु प्रमाणपत्र 15 अप्रैल, 2019 को जारी किया गया था, उसे दिया गया. इस प्रमाणपत्र को भी पुलिस नहीं मान रही है.
मृतक की भाभी राजकुमारी के मुताबिक वर्ष 2018 में स्थानीय गांव निवासी राम प्रसन्न भगत के द्वारा स्थानीय पुलिस को मेल में लेकर फर्जी तरीके से एक मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें आठ लोगों को आरोपित बनाया गया. राजकुमारी देवी के मुताबिक स्थानीय पुलिस से बार-बार इस बात को लेकर आग्रह किया गया है कि जिस आरोपित कि वह तलाश कर रहे हैं उसकी बचपन में ही मौत हो चुकी थी.
होगी जांच : एसपी
पुलिस कप्तान मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि इस तरह का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है. अगर ऐसा हुआ है तो पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की जायेगी. बच्चे की मौत हो चुकी है तो उनको न्याय मिलेगा. दोषी पुलिस अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी.
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