टीबी के तीन मरीजों को मिली नयी जिंदगी

Updated at : 06 Sep 2019 1:07 AM (IST)
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टीबी के तीन मरीजों को मिली नयी जिंदगी

गोविंद कुमार, गोपालगंज : अब टीबी के मरीजों को हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकती है. टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नयी टैबलेट बेडाक्यूलीन लांच की है, जिसकी कीमत नौ लाख रुपये से अधिक है. दवा की यह खर्च सरकार उठायेगी. इस टैबलेट का प्रयोग पहली बार टीबी के तीन मरीजों […]

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गोविंद कुमार, गोपालगंज : अब टीबी के मरीजों को हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकती है. टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नयी टैबलेट बेडाक्यूलीन लांच की है, जिसकी कीमत नौ लाख रुपये से अधिक है. दवा की यह खर्च सरकार उठायेगी. इस टैबलेट का प्रयोग पहली बार टीबी के तीन मरीजों पर किया जा रहा है, जिन्हें लंबे समय से चल रही टीबी बीमारी से छुटकारा मिलेगा.

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ पीएन राम ने बताया कि एमडीआर के मरीजों में तीन ऐसे मरीज थे, जिन्हें बेडाक्यूलीन देने की अनुशंसा की गयी. थावे के जगमलवा, एकडेरवा तथा कुचायकोट के टीबी मरीज को एंबुलेंस से पटना आइजीएमएस में भेजा गया. छह माह तक मरीजों को 180 बेडाक्यूलीन टेबलेट दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि एमडीआर मरीजों को अंतिम स्टेज में यह टैबलेट दिया जाता है.
बेडाक्यूलीन से टीबी हमेशा के लिए दूर हो सकता है. उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है. नयी इजाद की गयी डेलामिनिड टैबलेट 50 मिलीग्राम की है. दिन में दो बार इस टैबलेट को टीबी मरीजों को दिया जा रहा. टैबलेट देने के शुरुआती 15 दिनों तक मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, ताकि किसी प्रकार के साइड इफेक्ट से बचा जा सके.
45 साल बाद आयी नयी टैबलेट : डॉ पीएन
अभी तक एमडीआर रोगियों को दो साल तक दवाओं की खुराक लेनी पड़ती थी. एमडीआर रोगी के लिए कोई दवा अभी तक उपलब्ध नहीं थी. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ पीएन राम ने बताया कि 45 सालों के बाद नयी टैबलेट बेडाक्यूलीन को इजाद किया गया है. यह टैबलेट मात्र छह माह खानी है. उन रोगियों में यह दवा इस्तेमाल हो रही है, जिनको तीन या उससे अधिक दवाएं रेजिस्टेंट कर चुकी है.
क्या कहते हैं सीएस
टीबी रोगियों के लिए बेडाक्यूलीन दवा को लांच किया गया है. यह दवा मरीजों के लिए संजीवनी बन रही है. यह टैबलेट 18 साल से अधिक आयु वर्ग के लोगों को दी जा सकती है. अभी तक इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. एक मरीज पर करीब 10 लाख रुपये का खर्च आ रहा है, यह पूरा खर्च सरकार उठा रही है.
नंद किशोर सिंह, सीएस
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