अनियंत्रित ट्रक ने दर्जी को कुचला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Jul 2018 9:04 AM
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मौत के बाद परिजनों में मचा कोहराम भोरे से मीरगंज की ओर जा रहा था ट्रक मीरगंज : बड़कागांव-मीरगंज मुख्य सड़क पर अनियंत्रित ट्रक की ठोकर से एक दर्जी मौत हो गयी. इसके बाद ट्रक आगे जाकर गुमटी में घुस गया. इससे वहां पर अफरातफरी मच गयी. गनीमत थी कि गुमटी में कोई नहीं था, […]
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मौत के बाद परिजनों में मचा कोहराम
भोरे से मीरगंज की ओर जा रहा था ट्रक
मीरगंज : बड़कागांव-मीरगंज मुख्य सड़क पर अनियंत्रित ट्रक की ठोकर से एक दर्जी मौत हो गयी. इसके बाद ट्रक आगे जाकर गुमटी में घुस गया. इससे वहां पर अफरातफरी मच गयी. गनीमत थी कि गुमटी में कोई नहीं था, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था.
टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि दर्जी का शरीर कई टुकड़ों में बंट गया. मृतक हरि दर्जी (58 वर्ष) थाना क्षेत्र के बड़कागांव का निवासी था. मृतक के परिजनों ने बताया कि सोमवार को लगभग साढ़े दस बजे रात में हरि दर्जी शौच करने को लेकर सड़क पार कर रहा था. इसी दरम्यान भोरे की ओर से आ रहे एक बेलगाम ट्रक ने उसे ठोकर मार दिया. इससे हरि की मौके पर ही मौत हो गयी. वहीं, ठोकर मार कर भाग रहा ट्रक घटनास्थल से थोड़ी दूर पर एक गुमटी में धक्का मार दिया. इसके बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया. दर्जी की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया. घटना से आक्रोशित लोगों ने मीरगंज-बड़कागांव मुख्य सड़क पर शव रख कर जाम लगा दिया. सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस व स्थानीय बीडीसी दीपू कुमार शर्मा, मुखिया प्रतिनिधि अमरेंद्र प्रताप सिंह, संजय तिवारी, प्रेम पांडेय आदि ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझा कर जाम हटवाया.
परिजनों में मचा चीत्कार
मंगलवार की दोपहर पोस्टमार्टम के बाद बड़कागांव में मृतक का शव आते ही चीत्कार मच गया. मृतक की बेटियां पूनम, कुंती व बेटा ओमप्रकाश का रो-रोकर बुरा हाल था. हरि की पत्नी की मौत पहले ही हो चुकी है. अब पिता की मौत से बच्चे अनाथ हो गये हैं. नाते-रिश्तेदार सांत्वना देने में लगे हुए थे. दोपहर बाद मृतक का दाह-संस्कार करवा दिया गया.
मुखिया ने दिया मुआवजे का भरोसा
मृतक हरि दर्जी के परिजनों को स्थानीयमुखिया व बीडीसी ने कबीर अंत्येष्टि के अलावा अन्य मुआवजा दिलवाने का भरोसा दिलाया. दोनों जनप्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारियों से मिलकर परिजनों की यथासंभव मदद करने की बात बतायी.
दर्जी के काम से होता था परिवार का गुजारा
हरि दर्जी का काम कर अपना व परिवार का पालन-पोषण करता था. उसी की कमाई से जैसे-तैसे परिवार का गुजारा हो रहा था. पत्नी की मौत से दुखी व टूट चुका हरि बच्चों की खुशी में ही खुश था. हरि की मौत से बच्चों को गहरा सदमा पहुंचा है.
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