मां पूछ रही सवाल, क्या बिगाड़ा था मेरे लाल ने

Updated at : 10 Jul 2018 12:48 AM (IST)
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मां पूछ रही सवाल, क्या बिगाड़ा था मेरे लाल ने

मासूम अनिकेत की मौत के बाद बदहवास हो चुकी है मां, सूनीं आंखों से कर रही इंतजार मां के सवालों पर झरझर लोगों के गिर रहे आंसू अनिकेत की हत्या से ग्रामीणों की कांप उठी है रूह सुरेश कुमार राय भोरे : इस तस्वीर को जरा गौर से देखिये. ये वहीं मां है जिसकी गोद […]

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मासूम अनिकेत की मौत के बाद बदहवास हो चुकी है मां, सूनीं आंखों से कर रही इंतजार
मां के सवालों पर झरझर लोगों के गिर रहे आंसू
अनिकेत की हत्या से ग्रामीणों की कांप उठी है रूह
सुरेश कुमार राय
भोरे : इस तस्वीर को जरा गौर से देखिये. ये वहीं मां है जिसकी गोद एक मां ने ही उजाड़ दी. उसकी सूनी आंखों के दर्द को समझिये, चेहरे पर शून्य का भाव. बार-बार आंचल को निहारती आंखें. अचानक उसकी निद्रा टूटती है और वो फिर अपने आंचल से उन आंखों को पोंछने लगती है जिन आंखों के आंसू भी अब सूख चुके हैं
वो धार अब नहीं निकल रहे. चेहरे के भाव यह बताने के लिए काफी है कि वो कितना दर्द सह रही है. जमीन पर बैठ कर शून्य को निहारती आखें, मानों एक सवाल पूछ रही हो कि उस मासूम ने किसी का क्या बिगाड़ा था. अगर दुश्मनी ही थी तो मुझे मार डालते. कम से कम मेरे लाल की जिंदगी तो बख्श देते.
पास ही उसकी सास बैठी है, सास के हाथों में दूध की वो कटोरी है जिससे कभी अनिकेत दूध पीता था. उस कटोरी को देख कर उसकी आंखें भी नम हो जा रही हैं. फिर अचानक से मंजू देवी उठती है और कटोरी सास के हाथों से छीन कर अचानक चूल्हे की ओर दूध गर्म करने जाती है.
फिर कहती है मेरे बाबू को भूख लगी होगी. सहसा उसे यह एहसास होता है कि अब दूध पीने वाला मासूम ऐसी दुनिया में चला गया है जहां से कोई वापस नहीं आता. बस यहां यादें ही शेष रहती हैं. लेकिन इन बातों के मंजू के लिए कोई मायने नहीं है. उसके होठों पर बस एक ही सवाल है कि आखिर मेरे बेटे को इस कदर तड़पा कर क्यों मारा गया. उसे विश्वास है कि उसके जिगर का टुकड़ा जरूर आयेगा.
फिर परिवार के अन्य सदस्य पहुंचते हैं बदहवास हो चुकी मंजू को संभालने की कोशिश करते हैं. अचानक से मंजू चौंक जाती है आंचल को छूने से मना करती है. कहती है कि मत छुओ, मेरा बाबू मेरे आंचल में सोया है. ये शब्द हर किसी के सीने छलनी कर देते हैं. अचानक फिर से रोने-पीटने का माहौल हो जाता है. न जाने कब इस दर्द से परिवार के लोग उबर पाएं.
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