पिता का साया नहीं, अब मां की करनी की सजा भुगत रहे मासूम, दूधमुंही बच्ची मां के साथ जेल में

Published at :30 Aug 2017 8:02 PM (IST)
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पिता का साया नहीं, अब मां की करनी की सजा भुगत रहे मासूम, दूधमुंही बच्ची मां के साथ जेल में

भोरे (गोपालगंज) : पल भर में हंसता-खेलता परिवार बिखर जाता है, तो एक झटके में गैर भी अपने हो जाते हैं. इसे किस्मत का खेल कहें या नियति. जिस मां ने हर सितम सहते हुए कानून को अपने हाथों में लेकर बच्चों का पेट पाला, आज उसी कानून ने न सिर्फ उसे ही सजा दी […]

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भोरे (गोपालगंज) : पल भर में हंसता-खेलता परिवार बिखर जाता है, तो एक झटके में गैर भी अपने हो जाते हैं. इसे किस्मत का खेल कहें या नियति. जिस मां ने हर सितम सहते हुए कानून को अपने हाथों में लेकर बच्चों का पेट पाला, आज उसी कानून ने न सिर्फ उसे ही सजा दी है, बल्कि उन छह मासूमों को भी सजा मिली है, जो उसी मां की कोख से पैदा हुए थे. एक बच्चा तो अपनी मां के साथ सलाखों के पीछे भी पहुंच गया, लेकिन पांच छोटे-छोटे बच्चे आज मां के रहते भी अनाथ हो चुके हैं. बाप का साया तो पहले ही उठ चुका था, अब मां जेल में है. ऐसे में ये मासूम बच्चे बस्ती वालों के रहमोकरम पर जी रहे हैं.

पांच मासूम बच्चों की शून्य को निहारती आंखें एक साथ कई सवाल पैदा कर देती हैं. यह दर्द भरी दास्तां उस रसीदा खातून की है, जिसके साथ नियति ने क्रूर मजाक किया है. पहले पति को छीन लिया और अब बच्चे मां के बिना अनाथ-से हो गये हैं. फुलवरिया थाना क्षेत्र के श्रीपुर खाप गांव निवासी जमादार मियां का निकाह रसीदा खातून से दस साल पहले हुआ था. जमादार को एक-एक कर छह बच्चे हुए. परिवार बढ़ा, तो जिम्मेदारियां भी बढ़ीं, लेकिन एक साल पहले रसीदा की जिंदगी में एक ऐसा तूफान आया कि उसका पूरा परिवार तबाही के कगार पर पहुंच गया. हार्ट अटैक हो जाने के कारण उसके पति की मौत हो गयी.

पति की मौत के बाद मुफलिसी में जी रही रसीदा के कंधों पर अचानक छह बच्चों की जिम्मेदारी आ गयी. बच्चों का पेट भरने के लिए उसने मजदूरी की, लेकिन काम नहीं मिलने के कारण बच्चों का पेट पालना मुश्किल हो गया. ऐसे में किसी ने उसे शराब उपलब्ध कराना शुरू किया, जिसे बेच कर वह किसी तरह अपना गुजार-बसर करने लगी, लेकिन कानून की नजर में यह गलत था. श्रीपुर की पुलिस ने उसे 46 बोतल शराब के साथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उसके सभी मासूम बच्चे मुस्कान (9 वर्ष), अरमान (7 वर्ष), आशिक (5 वर्ष), इम्तेयाज (3 वर्ष), शब्बू (1.5 वर्ष) और शबनम (छह माह) थाने आये. हालांकि, मां ने पांच बच्चों को घर भेज दिया. लेकिन, उसके साथ एक मासूम जेल की सलाखों में चली गयी.

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