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शिक्षक नेता नर्मदेश्वर शर्मा के स्मृति दिवस पर जुटे शिक्षक व जनप्रतिनिधि
बिहार की समकालीन शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका पर हुई चर्चा
रेडक्रॉस भवन में शिक्षकों के स्थानांतरण, वरीयता, प्रोन्नति, एचआर व अन्य समस्याओं पर मंथन
संवाददाता, गया जी
शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज की दिशा-दशा और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है. शिक्षक संवाद जैसे कार्यक्रम आत्मचिंतन, अनुभवों के आदान-प्रदान और नवाचार के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं. ये बातें गुरुवार को बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने कहीं. मौका था शहर के रेडक्रॉस भवन में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता एवं शिक्षकों के प्रवक्ता नर्मदेश्वर शर्मा उर्फ पन्ना बाबू के स्मृति दिवस के अवसर पर शिक्षक संवाद कार्यक्रम का. इसमें एमएलसी जीवन कुमार भी उपस्थित रहे. शिक्षक संवाद के विषय बिहार की समकालीन शिक्षा में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा हुई. कार्यक्रम का उद्घाटन व पन्ना बाबू को श्रद्धांजलि देकर हुआ. डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल ज्ञान के हस्तांतरण तक सीमित नहीं रह गयी है. बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक, प्रेरक और परिवर्तन कर्ता के रूप में और भी महत्वपूर्ण हो गयी है. नयी तकनीकों, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों तथा विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को निरंतर अपडेट रखना वर्तमान की आवश्यकता है. ऐसे संवाद कार्यक्रम शिक्षकों को अपनी चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करने, समाधान खोजने और सफल शिक्षण अनुभवों को साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं. इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ विद्यार्थियों और समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य पर सबसे अधिक बजट खर्च कर रही है. शिक्षकों की समस्या निराकरण के लिए जल्द ही डीइओ के साथ बैठक करेंगे, जिसमें संघ के पदाधिकारी भी होंगे. राज्यस्तर पर शिक्षा मंत्री के साथ बैठक कर शिक्षकों के लंबित मामले के निराकरण का प्रयास करेंगे. वक्ताओं ने विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर शैक्षणिक महौल, टोला सेवकों की ओर से विद्यालय निरीक्षण व अन्य बिंदुओं पर चर्चा हुई. 12 सूत्री मांग पत्र जनप्रतिनिधियों को सौंपा गया. स्काउट एंड गाइड की बच्चियों ने सभी का गान से स्वागत किया.शिक्षकों का ट्रांसफर यूनिट सिस्टम के तहत हो : जीवन
एमएलसी जीवन कुमार ने शिक्षक नेता नर्मदेश्वर शर्मा को अभिभावक तुल्य बताते हुए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि मैं शिक्षकों के संघर्ष का साथी हूं. शुरू से कह रहा था कि एजुकेशन में शिक्षकों का नियोजन अच्छी बात नहीं. हम सभी ने मिलकर संघर्ष किया और अधिकतर शिक्षकों ने राज्यकर्मी का दर्जा पा लिया है. मदरसा शिक्षकों के लिए काम हुआ है. संस्कृत शिक्षकों की समस्या बनी है. ट्रे वन, टू व थ्री के शिक्षकों के लिए भी सातवें वेतन आयोग की मांग है, जो मिलनी चाहिए. शिक्षकों की मूल समस्या स्थानांतरण थी, जिसको हद तक दूर किया गया है. इस दिशा में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार काम कर रहे हैं. शिक्षकों की प्रोन्नति को लेकर विभाग से चिट्ठी निकली है. प्रोन्नति धरातल पर दिखे, इसके लिए चर्चा के दौरान स्पीकर डॉ प्रेम कुमार ने काम करने की बात कही है. शैक्षणिक क्रांति कैस हो, नेतरहाट, नवोदय जैसे विद्यालय बने, ताकि लाेग बच्चों को सरकारी विद्यालय में एडमिशन के लिए प्रेरित हों. इस पर काम हो रहा है. हर प्रखंड में मॉडल विद्यालय होंगे. आज बिहार में भी शिक्षक-छात्र अनुपात करीब 1:30 हो गया है. मेरी सोच है कि यूनिट सिस्टम के तहत शिक्षकों का ट्रांसफर हो, जिसमें सब्जेक्ट के खाली स्थान पर वहीं विषय के शिक्षक आये. इससे विषयवार शिक्षकों की कमी स्कूलों में नहीं होगी.कई शिक्षक नेता व जनप्रतिनिधि जुटे
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाध्यापक सच्चिदानंद प्रेमी, मंच संचालन मनोज कुमार निराला ने किया. माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रमंडलीय कार्यकारिणी सदस्य रंजीत कुमार ने कहा कि यह शिक्षा नीति शिक्षकों के पुराने सम्मान को लौटाने की अनुशंसा करती है, शिक्षकों से स्पंदनशील शैक्षिक वातावरण निर्माण की अपेक्षा रखती है. परंतु, शिक्षकों के वेतनमान को लेकर चुप्पी साध लेती है, उनके सेवा शर्त को कमजोर करती है. गया जिला पार्षद उपाध्यक्ष शीतल यादव ने बैठक में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया. संबोधित करने वालों में पूर्व जिला सचिव ब्रजभूषण सिंह चौहान, जहानाबाद जिला पार्षद उपाध्यक्ष रानी कुमारी, रामरूप चौधरी , प्रारंभिक शिक्षक संघ के रमेश कुमार, औरंगाबाद से दयानंद कुमार, जिला माध्यमिक शिक्षक संघ गया के पूर्व उपाध्यक्ष रवींद्र कुमार, प्रमंडलीय उपाध्यक्ष डॉ हिरालाल यादव, पुरुषोत्तम पांडेय, जगनारायण यादव, प्रमोद कुमार, डॉ अविनाश कुमार, राजीव नयन व अन्य रहे. .
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