गया हिंदी साहित्य सम्मेलन में काव्य संध्या का 623वां आयोजन, कवियों की प्रस्तुतियों से सजी यादगार शाम
कार्यक्रम में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network
गया जी जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन में काव्य संध्या का 623वां चरण कविताओं और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से जीवंत हो उठा. साहित्यकारों ने सावन के मौसम, कश्मीर की सुंदरता और राष्ट्रीयता के भावों को अपनी रचनाओं में पिरोया.
Gaya Ji Kavya Sandhya : आजाद पार्क स्थित गया जी जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन में काव्य संध्या के 623वें चरण का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सभापति सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र और संचालन सहज कुमार ने किया. कार्यक्रम का श्रीगणेश करते हुए विजय श्री ने कहा- अएलइ सावन के महिनमा दिनमा पावन लागे ना... वहीं, शंकर प्रसाद ने सूर्यपुत्र कर्ण की काव्यमय कथा सुनाई.
कवियों द्वारा प्रस्तुत की गईं रचनाएं और कविताएं
चन्द्रदेव प्रसाद केशरी ने सुनाया- जय जय हे सरस्वती माता तेरे द्वारे जो भी आता.. डॉ. मुरली मनोहर पांडेय ने कहा- सुनके भक्तों की पुकार होके नंदी पर सवार... संधि नहीं अब युद्ध होगा शत्रुओं का दमन होगा... सुनाकर नंद किशोर सिंह ने सदन में राष्ट्रीय भाव को तरोताजा कर दिया. घनश्याम अवस्थी ने 'बादल बरसों' शीर्षक कविता प्रस्तुत कर सभी को भाव-विभोर कर दिया.
डॉ. राकेश कुमार सिन्हा 'रवि' ने कहा- अब केकरो समझाना चाहे बताना जुग के नयका हवा में नऽ हे असान... विपिन बिहारी ने गजल सुनाई- जो होता ही नहीं वो इश्तिहार में आ जाता है.
सावन, कश्मीर और समसामयिक विषयों पर प्रस्तुतियां
कवि सुरेन्द्र पांडेय सौरभ ने कहा- सावन बदल रहा है मौसम से लड़ रहा है.. अनिल कुमार गुप्ता ने कश्मीर पर सुनाया- मैं कवियों की कल्पना हूं, जन्नत हूं मैं. उदय सिंह ने सुनाया- जेन जेड से सदा करें बात.. नौशाद नादान ने गजल पेश की- हमारी आंखें तुम्हारी आंखें किताब जैसी हैं.. कवि बैजू सिंह ने सुनाया- लाती नहीं अब दुलहिनियां गुड़ का ठेकुआ क्यों.. अरुण हरलीवाल ने व्यंग्य सुनाया- माल तुम्हारी देह हमारी दोनों की बराबर भागीदारी. खालिद हुसैन परदेसी ने सुनाया- मेरा महबूब आएगा बरसात में.
अन्य रचनाकारों की प्रस्तुतियां और समापन
इसके साथ ही अतुलित उदय, डॉ. निरंजन श्रीवास्तव, जयप्रकाश कुमार, सुमन विश्वकर्मा विकल, बिनोद बरबिगहिया, उपेंद्र सिंह, कुणाल किशोर ने अपनी प्रस्तुति दी. अंत में महामंत्री सुमंत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ काव्य संध्या का समापन हुआ.
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