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गांव छोड़ों वर्ना भुगतना होगा ऐसा ही अंजाम, नहीं करेगा कोई खेती-बाड़ी, जाते-जाते फरमान सुना गये नक्सली...

Bihar News नक्सलियों का मानना है कि उन लोगों के द्वारा ही उनके चारों साथियों की हत्या करायी गयी है और उसी का बदला लिया है. सुकवरिया देवी ने बताया कि नक्सलियों ने पूरे परिवार को घर छोड़ने को कहा है. साथ ही कहा है कि गांव नहीं छोड़ने पर इन चारों की तरह अंजाम भुगताने होंगे.

By Radheshyam Kushwaha
Updated Date
गांव छोड़कर जा रहे पीड़ित परिवार
गांव छोड़कर जा रहे पीड़ित परिवार
प्रभात खबर

Bihar News: बिहार के गया जिले में नक्सली संगठन भाकपा माओवादी ने डुमरिया में एक ही परिवार की दो महिलाओं सहित चार की हत्या कर एक बार फिर अपनी उपस्थिति कायम कर दी है. पंचायत चुनाव के पहले चार लोगों की हत्या से पूरा प्रखंड क्षेत्र दहशत में है. हत्या करने के बाद नक्सलियों द्वारा छोड़े गये पर्चे में लिखा गया है कि उन्होंने अपने चार साथियों की हत्या का बदला फांसी देकर लिया है. नक्सलियों ने जाते-जाते सरयू सिंह भोक्त के घर में आग लगा दी. मृतक की मां सुकवरिया देवी बताती हैं कि शनिवार की रात हथियार से लैस नक्सली आये व उनके पति सरयू सिंह को खोज रहे थे.

नहीं मिलने पर उनके दो बेटों व दो बहुओं की हत्या कर दी. जाते-जाते घर छोड़ने की धमकी भी दी. साथ ही खेती करने के लिए प्रतिबंध भी लगा दिया है. सुकवरिया देवी बताती हैं कि छह माह पूर्व चार नक्सलियों को पुलिस ने मार गिराया था. नक्सलियों का मानना है कि उन लोगों के द्वारा ही उनके चारों साथियों की हत्या करायी गयी है और उसी का बदला लिया है. सुकवरिया देवी ने बताया कि नक्सलियों ने पूरे परिवार को घर छोड़ने को कहा है. साथ ही कहा है कि गांव नहीं छोड़ने पर इन चारों की तरह अंजाम भुगताने होंगे.

तीन बच्चों व पूरे सामान के साथ घर छोड़ कर जा रही पिंटू देवी, पति सुरेंद्र सिंह व बबीता देवी पति वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नक्सलियों की धमकी के डर से घर छोड़ कर पलायन कर रही हैं. इन लोगों ने बताया कि रात को घटना के अंजाम देने के बाद कहा कि पूरा परिवार घर छोड़ दे, अन्यथा इन लोगों की तरह अंजाम भुगतना होगा. महिलाओं ने बताया कि अभी पास के स्कूल में या सामुदायिक भवन में रहेंगे. इसके बाद अपने किसी परिवार के यहां शरण लेंगे. आखिर यहां कुछ बचा ही नहीं, जमीन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

अपने माता-पिता व चाचा चाची को फांसी से लटकते देख अचेत हुए बच्चे

मृतक महेंद्र सिंह भोक्ता के 10 वर्षीय पुत्र प्रिंस व मृतक सत्येंद्र सिंह भोक्ता के 10 वर्षीय पुत्र रवि, 12 वर्षीय पुत्र आनंद, चौदह वर्षीय पुत्र रामजीत व 16 वर्षीय मैट्रिक पास पुत्री शोभा कुमारी अपने माता-पिता व चाचा-चाची को शव देखते ही दहाड़ मार कर रोने लगे. शोभा कुमारी कई बार अचेत भी हो गयी. गांववाले एवं सगे संबंधी होश में लाते दिखाई दिये. इतनी बड़ी घटना कभी जीवन में होगी, ये मासूम बच्चे कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा. प्रिंस के आंखों में आंसू की धरा थमने का नाम नहीं ले रही थी.

रोते-रोते उसने बताया कि हमर सब परिवरवा के पटीयन वाला मार देलकइ. यह सुन कर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गयीं. डुमरिया प्रखंड के काचर पंचायत के वार्ड नंबर एक के वार्ड सचिव के पद पर मृतक महेंद्र सिंह भोक्ता अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे. महेंद्र सिंह भोक्ता व इनकी पत्नी सुनीता देवी की मौत के बाद चार बच्चों की परवरिश कैसे होगी यह समय के गर्भ में छिपा है.

घटनास्थल पर पर्चा हुआ है बरामद

घटनास्थल पर जनमुक्ति छापामार सेना मध्य जोन कमांड के तहत एक पर्चा चसपाया है. इसमें कहा गया है कि इंसानियत के हत्यारें, गद्दारों व विश्वासद्यातियों को सजा ए मौत के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है. अमर शहीद कामरेड अमरेश, सीता, शिव पूजन एवं उदय की हत्या करवाने व अर्धसैनिक बलों और पुलिस के वरीय अधिकारियों को आम जनता मौत की सजा दे. अमर शहीद कामरेड अमरेश, सीता, शिवपूजन व उदय को षडयंत्र व जहर खिलाकर अर्धसैनिक बलों द्वारा हत्या करवानेवाले सत्येंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, मनोजवा देवी व सुनिता देवी को फांसी दी गयी है. अमर शहीद कामरेड अमरेश, सीता, शिवपूजन एवं उदय को हत्या राजनीतिक बदला लेने के लिए व्यापक जनता आगे आने का अपील की है. अमर शहीद कामरेड अमरेश, सीता, शिवपूजन एवं उदय का हत्या में शामिल लोगों का सफाया करके ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

कड़ी मशक्कत के बाद चारों शव लाये गये डुमरिया थाना

डुमरिया प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर मोनवार गांव का टोला बधबोरवा बसा हुआ है. इस टोला के कुछ ही दूरी पर मोरबोलवा पहाडी है. इस पहाडी का आधा हिस्सा गया जिला में तो आधा हिस्सा औरंगाबाद में स्थित है. इस पहाड़ी के लगभग चार-पांच किलोमीटर दूर पर पलामू की पहाड़ी प्रारंभ हो जाता है. डुमरिया प्रखंड मुख्यालय से कुछ दूरी तक सड़क ठीक है, जहां चारपहिया वाहन पहुंच जाता है. उसके बाद आने-जाने का मुख्य मार्ग पगडंडी ही है. इसके अलावा कोई भी रास्ता नहीं है. लगभग छह-सात किलोमीटर जंगल पहाड़ के पगडंडी पार करने के बाद मोनवार पहुंचा जा सकता है. घटना के बाद पहुंची पुलिस कड़ी मशस्कत के बाद चारों शवों को फांसी के फंदे से उतार कर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को डुमरिया थाना लाने में कामयाब हुई.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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