कालचक्र मैदान में चार को आयोजित होगी झकझोर झूमर संध्या
Published by : KALENDRA PRATAP SINGH Updated At : 27 Sep 2025 6:49 PM
झूमर समाज की पहचान उसकी आदिम संस्कृति परंपरा और जीवन दर्शन से होती है. यह समाज हमेशा से प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर अपनी लोक कला लोकगीत नृत्य और रीति रिवाज के आधार पर जीवन जीता आया है.
बोधगया. झूमर समाज की पहचान उसकी आदिम संस्कृति परंपरा और जीवन दर्शन से होती है. यह समाज हमेशा से प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर अपनी लोक कला लोकगीत नृत्य और रीति रिवाज के आधार पर जीवन जीता आया है. इतिहास गवाह है कि जिस समाज ने अपनी संस्कृति को आधार बनाकर जीवन जीने की कोशिश की है, उसका जीवन हमेशा सफल संतुलित और सार्थक रहा है. संस्कृति न केवल हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है बल्कि हमें आत्मविश्वास और पहचान भी देती है. इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी चार अक्तूबर को झकझोर झूमर सांस्कृतिक कार्यक्रम संध्या का आयोजन कालचक्र मैदान, बोधगया में आयोजित किया जायेगा. इसे लेकर एक बैठक की गयी व इसमें में तैयारी समिति के नंदलाल मांझी, अधिवक्ता शंकर मांझी, विकास मांझी, दीना मांझी, नरेश मांझी, नारायण प्रसाद मांझी, चंदन सुरेश मांझी, मनोज मांझी, पंकज मांझी सहित अन्य उपस्थित हुए.
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