गया के गांवों में स्वावलंबन का अलख जगा रहीं द्रौपदी, हजारों महिलाओं को जोड़ा स्वरोजगार से

Updated at : 07 Aug 2022 4:48 AM (IST)
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गया के गांवों में स्वावलंबन का अलख जगा रहीं द्रौपदी, हजारों महिलाओं को जोड़ा स्वरोजगार से

बांकेबाजार में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर आदर्श महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड नामक संस्था की स्थापना की गयी. प्रखंड के सैफगंज गांव की रहनेवाली द्रौपदी देवी को संगठन का अध्यक्ष बनाया गया.

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ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी रोजगार एक अहम मुद्दा बना है. खास कर गांवों की महिलाओं को तो कुछ करने में विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में बांकेबाजार की द्रौपदी देवी हजारों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ कर उनके लिए प्रेरणा की स्रोत बन गयी हैं. इनका मिशन समाज में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर उनका सशक्तीकरण करना है. ऐसे में अब इन्हें कई अन्य संस्थाओं का भी सहयोग मिलने लगा है, जो इनके कारवां को आगे बढ़ा रहा है.

इस तरह शुरू हुआ सफर

बांकेबाजार में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर आदर्श महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड नामक संस्था की स्थापना की गयी. प्रखंड के सैफगंज गांव की रहनेवाली द्रौपदी देवी को संगठन का अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद इन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और 20 अप्रैल 2006 से अब तक इस संस्था के अध्यक्ष पद पर रह कर द्रौपदी देवी ने हजारों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा है.

द्रौपदी देवी की अध्यक्षता में इस संगठन से 989 समूह बनाये गये

द्रौपदी देवी की अध्यक्षता में इस संगठन से 989 समूह बनाये गये हैं. प्रत्येक समूह में 15-15 महिलाओं को जोड़ा गया. सभी महिलाएं इस संस्था से जुड़ कर वित्तीय, सामाजिक और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रही हैं. द्रौपदी देवी कम पैसे में अधिक मुनाफा के लिए खेती के लिए महिला किसानों को जागरूक करती हैं. बड़े पैमाने पर महिलाएं मशरूम की खेती के लिए आत्मनिर्भर बनी हैं. इनकी प्रेरणा से 200 से अधिक महिला किसान मशरूम की खेती में व्यस्त हैं. संस्था के गठन से पूर्व द्रौपदी देवी नेहरू युवा केंद्र से भी जुड़ी थीं.

2002 में प्रगति महिला मंडल की सचिव बनायी गयीं

2002 में प्रगति महिला मंडल की सचिव बनायी गयीं. इसके लिए द्रौपदी देवी ने प्रशिक्षण भी लिया. सर्व सेवा समिति संस्थान से जुड़ कर 2002-2003 में गांव-गांव में जाकर महिलाओं को संस्था से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. करीब डेढ़ सौ समूहों का भी गठन किया गया. ग्रामीण क्षेत्र में घर में रह रहीं महिलाओं को बाहर निकाल कर आत्मनिर्भर बनाने में द्रौपदी देवी का विशेष योगदान है. वह एफपीओ से जुड़ कर महिला किसानों को स्वरोजगार अपनाने के लिए दाल, तेल, किचन, गार्डन, लेमन ग्रास की खेती के लिए भी प्रेरित करती हैं.

महिलाओं को करती हैं प्रशिक्षित

द्रौपदी देवी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें हर काम के लिए प्रशिक्षित भी करती हैं. चाहे वह कृषि का क्षेत्र हो या सामाजिक. एक छोटे से कस्बे में रह कर द्रौपदी ने आलू, मशरूम, धान आदि की खेती के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग दी. साथ ही, समूह से जुड़ी महिलाओं को लोन भी देती हैं.

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रोजगार मिलने से महिलाओं में उत्साह

द्रौपदी देवी के प्रयास से महिलाएं रोजगार पाकर अच्छी आमदनी कर रही हैं. आर्थिक स्थिति अच्छी होने पर बच्चों की पढ़ाई के साथ परिवार का भरण-पोषण भी अच्छे तरीके से हो रहा है. ऐसे में परिवार के अन्य सदस्यों का भी महिलाओं को साथ मिल रहा है, जो उनके उत्साह को बढ़ा रहा है.

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