‘डिप्टी कलेक्टरी’ पर चर्चा, मध्यम वर्ग के संघर्ष को बताया मार्मिक

कहानी विद कॉफी कार्यक्रम की 19वीं कड़ी में का आयोजन हुआ.
टिकारी. नगर के किला अंदर क्षेत्र में आयोजित ‘कहानी विद कॉफी’ कार्यक्रम की 19वीं कड़ी में कथाकार अमरकांत की कहानी ‘डिप्टी कलेक्टरी’ पर पाठ व चर्चा हुई. इस दौरान व्यवसायी सुरेश सिंह ने कहा कि कहानी पिता के संघर्ष, संवेदना, कर्तव्यबोध और मध्यम वर्ग के जीवन की मार्मिक प्रस्तुति है, जिसमें पिता अपने पुत्र को डिप्टी कलेक्टर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करता है. उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद पिता कर्ज लेकर बेटे की पढ़ाई कराता है, लेकिन अंतिम परिणाम में सफलता नहीं मिलने पर उसके सपने टूट जाते हैं और अंततः उसे बेटे की सलामती में ही संतोष मिलता है. वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के शोधार्थी मनीष कुमार ने कहा कि 1955 में लिखी यह कहानी आजादी के बाद के भारत में भ्रष्टाचार और सरकारी पद की चाह को दर्शाती है. कार्यक्रम की शुरुआत संजय अथर्व ने कहानी पाठ से की और संचालन भी किया. सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु शेखर ने इसे मध्यम वर्ग के सरकारी नौकरी के प्रति मोह का चित्रण बताया. वरिष्ठ शिक्षक डॉ राजन ने कहानी के सुखांत अंत की आवश्यकता बतायी. अंत में बीपीएन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रखने की बात कही.
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