सिहाड़ी मुहल्ले में पानी ढोने के चक्कर में बच्चों की छूट रही पढ़ाई

Published by :PRANJAL PANDEY
Published at :24 Apr 2026 10:27 PM (IST)
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सिहाड़ी मुहल्ले में पानी ढोने के चक्कर में बच्चों की छूट रही पढ़ाई

नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 29 स्थित सिहाड़ी मुहल्ले के लोग पानी के लिए रोज अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं.

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गया जी़ नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 29 स्थित सिहाड़ी मुहल्ले के लोग पानी के लिए रोज अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. हालत इतनी बदतर हो गयी है कि घर के लिए पानी का जुगाड़ करने के चक्कर में मुहल्ले के बच्चों ने स्कूल जाना तक छोड़ दिया है. शहर में नल-जल योजना पूरी होने के बड़े-बड़े दावे किये गये, लेकिन हकीकत यह है कि इस मुहल्ले में पाइपलाइन का काम आधा-अधूरा छोड़कर निगम प्रशासन गहरी नींद में सो गया है. गर्मी की शुरुआत के साथ ही यहां पानी के लिए त्राहिमाम मच गया है. स्थानीय लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए करीब आधा किलोमीटर दूर सैनिक कॉलोनी मोड़ के पास बने मिनी जलापूर्ति केंद्र से पानी लाना पड़ता है. इसके लिए उन्हें गया-चेरकी रोड पार करनी पड़ती है. इस मुख्य मार्ग पर हर वक्त तेज रफ्तार गाड़ियों का आना-जाना लगा रहता है. तसला और बाल्टी में पानी भरकर सड़क पार करते समय महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा मंडराता रहता है.

सरकारी बोरिंग, लेकिन मेंटेनेंस का पैसा देते हैं लोग

मुहल्ले के लोगों का दर्द सिर्फ पानी ढोने तक सीमित नहीं है. जलापूर्ति केंद्र की मोटर खराब होने पर निगम उसे ठीक कराने भी नहीं आता. स्थानीय लोगों का कहना है कि मोटर खराब होने पर मुहल्ले के हर घर से चंदा इकट्ठा कर इसे बनवाना पड़ता है. एक तरह से लोग पानी खरीद कर पीने को मजबूर हैं. मुहल्ले में शादी-ब्याह या अन्य आयोजन के समय पानी की किल्लत सबसे ज्यादा रुलाती है. निगम को सूचना देने के बावजूद समय पर पानी का टैंकर नहीं पहुंचता. सड़क दुर्घटना के खतरे और पानी की किल्लत को देखते हुए लोगों ने निगम से तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की है.

पार्षद ने मानी निगम की नाकामी

वार्ड 29 के पार्षद रणधीर कुमार रजक ने खुद इस बदहाली और निगम की नाकामी को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि सिहाड़ी के लोग वर्षों से पानी की कमी का दंश झेल रहे हैं. काफी प्रयास के बाद पाइपलाइन बिछाने का निर्देश तो जारी हुआ, लेकिन ठेकेदार काम आधा-अधूरा छोड़कर चला गया. पार्षद के मुताबिक, उन्होंने निगम की बैठकों में इस जानलेवा समस्या को कई बार उठाया है, लेकिन उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है, समाधान नहीं.

क्या कहते हैं लोग

यहां पर आधा-अधूरा पाइपलाइन बिछाने के बाद काम को समाप्त कर दिया गया है. पानी यहां पर पाइपलाइन से अब तक शुरू नहीं किया गया है. चंदा देकर मोटर बनवाना होता है.

नीलम देवी, स्थानीय

मुहल्ले में शादी-ब्याह व अन्य तरह के आयोजन होने के समय ही सब को पानी की चिंता सताती है. निगम को सूचना देने के बाद भी समय पर टैंकर नहीं पहुंचता है.

आरती कुमारी, स्थानीय

रोड चालू होने पर बच्चे से लेकर बड़े तक सड़क पार होकर पानी लेने के लिए पहुंचते हैं. हर वक्त एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है. निगम को विचार करना चाहिए.

रूबी देवी, स्थानीय

सरकारी बोरिंग से रोड पार कर पानी लेने पहुंचते हैं. मोटर खराब होने के बाद हर माह लगभग 500 रुपया सभी घरों से चंदा देना पड़ता है. यहां से खरीद कर ही पानी पी रहे हैं.

फुलवा देवी, स्थानीय

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