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BodhGaya : विश्व शांति के लिए पालि व संस्कृत परंपरा के बौद्धों में बढ़ाया जाएगा समन्वय

Updated at : 25 Dec 2022 4:00 AM (IST)
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BodhGaya : विश्व शांति के लिए पालि व संस्कृत परंपरा के बौद्धों में बढ़ाया जाएगा समन्वय

बौद्ध धर्म भारत से निकल कर थाइलैंड व अन्य पड़ोसी देशों के साथ श्रीलंका पहुंचा. यह पालि भाषा के माध्यम से उक्त देशों तक पहुंचा, जबकि संस्कृत भाषा के माध्यम से तिब्बत व आसपास के अन्य देशों में बौद्ध धर्म पहुंचा. आज स्थिति यह हो गयी है कि एक ही धर्म को दो परंपरा व नजरिया से देखा जाने लगा है.

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विश्व में शांति की भावना को और बढ़ावा देने के उद्देश्य से पालि व संस्कृत परंपरा से जुड़े बौद्ध भिक्षुओं व लामाओं को एक छतरी के नीचे लाने की पहल का आगाज मंगलवार को बोधगया स्थित वट्पा बौद्ध मठ में किया जायेगा. बौद्ध धर्मगुरु 14वें दलाईलामा इसका शुभारंभ करेंगे और इसमें पालि व संस्कृत परंपरा से जुड़े बौद्ध भिक्षुओं व लामाओं के बीच आपसी समन्वय स्थापित करने को लेकर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जायेगा.

दलाईलामा पांच वर्षीय कार्यक्रम का करेंगे शुभारंभ

पालि व संस्कृत इंटरनेशनल भिक्खु एक्सचेंज प्रोग्राम के नाम से आयोजित कार्यक्रम पंचवर्षीय योजना के तहत काम करेगा. इस संबंध में शनिवार को कार्यक्रम स्थल वट्पा बौद्ध मठ में आयोजन समिति द्वारा प्रेसवार्ता कर विस्तृत जानकारी दी गयी. इसमें कहा गया कि बौद्ध धर्म भारत से निकल कर थाइलैंड व अन्य पड़ोसी देशों के साथ श्रीलंका पहुंचा. यह पालि भाषा के माध्यम से उक्त देशों तक पहुंचा, जबकि संस्कृत भाषा के माध्यम से तिब्बत व आसपास के अन्य देशों में बौद्ध धर्म पहुंचा. आज स्थिति यह हो गयी है कि एक ही धर्म को दो परंपरा व नजरिया से देखा जाने लगा है.

पालि व संस्कृत परंपरा से जुडे बुद्धिस्टों में कुछ मामलों में मतभेद है

पालि व संस्कृत परंपरा से जुडे बुद्धिस्टों में कुछ मामलों में मतभेद है. इसे समाप्त करते हुए एक मंच पर लाने का प्रयास है. धर्मगुरु दलाई लामा की सोच है कि दोनों परंपरा से जुड़े भिक्षुओं व लामाओं में आपसी समन्वय स्थापित कर विश्व बिरादरी को शांति की राह पर ले जाने में बुद्ध के अनुयायी काम करें. इससे विश्व का कल्याण आसान हो जायेगा.

200 श्रद्धालु शामिल होंगे

प्रेस वार्ता में बताया गया कि एक्सचेंज प्रोग्राम की शुरूआत बोधगया से की जा रही है व इसमें पालि परंपरा से जुड़े थाइलैंड व श्रीलंका और संस्कृत परंपरा से जुड़े तिब्बत व भारत के 150 भिक्षु और लामा के साथ 200 श्रद्धालु शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि पांच वर्षीय कार्यक्रम के तहत संस्कृत परंपरा से जुड़े लामा पालि परंपरा से जुड़े देशों के बौद्ध मठों, विश्वविद्यालयों व कॉलेजों का भ्रमण करेंगे और अपनी बात रखेंगे और उनकी बातों को सुनेंगे.

दोनों परंपरा के बौद्धों में बढ़ाया जाएगा समन्वय

दोनों परंपराओं के बीच आपसी समन्वय स्थापित करने व मौजूद भ्रांतियों को दूर करने का यह प्रयास है. इसके तहत अन्य कई कार्यक्रम भी आयोजित होते रहेंगे. वट्पा बौद्ध मठ में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में इन्ही विषयों पर चर्चा होगी व इसमें पालि व संस्कृत परंपरा से जुड़े बौद्ध विद्वान अपनी बात रखेंगे. प्रेसवार्ता में वट्पा बौद्ध मठ के संस्थापक मुख्य भिक्षु फ्रा बोधिनंदामुनि, सचिव डॉ रत्नेश्वर चकमा, गोमांग खेंपो, खेंजुर लोबसांग ग्यात्सेन , प्रो ताशी छेरिंग, दलाई लामा का दक्षिण-पूर्व एशिया के कोऑर्डिनेटर डॉ जिंपा ग्यात्सो, वेन न्यीमा नेगी व वेन दोरजे शामिल थे.

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