स्कूली बच्चों ने जाना बुजुर्गों का महत्व

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स्कूली बच्चों ने जाना बुजुर्गों का महत्वगया. बच्चों के उत्थान में दादा-दादी व नाना-नानी का महत्वपूर्ण योगदान होता है. बच्चों को संस्कारिक जीवनशैली व व्यावहारिक जीवन के रहस्य को बताने में भूमिका अदा करने की जिम्मेवारी निभाते हैं. उक्त बातें कर्नल किशोर गिरि ने कहीं. वह बुधवार को केंद्रीय विद्यालय शाखा दो ओटीए में आयोजित […]

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स्कूली बच्चों ने जाना बुजुर्गों का महत्वगया. बच्चों के उत्थान में दादा-दादी व नाना-नानी का महत्वपूर्ण योगदान होता है. बच्चों को संस्कारिक जीवनशैली व व्यावहारिक जीवन के रहस्य को बताने में भूमिका अदा करने की जिम्मेवारी निभाते हैं. उक्त बातें कर्नल किशोर गिरि ने कहीं. वह बुधवार को केंद्रीय विद्यालय शाखा दो ओटीए में आयोजित दादा-दादी व नाना-नानी दिवस को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि बच्चे देश के भविष्य होते हैं. बच्चों को शिक्षा व सामाजिक कर्तव्य से अवगत कराये बिना हम सभ्य समाज की परिकल्पना नहीं कर सकते. समारोह में दिलकिशोर सिंह को दादा व शारदा सिंह को दादी के रूप में चयनित कर गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया. इस मौके पर विद्यालय के संगीत शिक्षक गृजेश सिन्हा के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने संगीत, नाटक व नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं. इस मौके पर प्राचार्य पी लकड़ा, अरुणिमा राय, जैनेंद्र कुमार मालवीय, सुशील कुमार, एच तरुण, मिथिलेश कुमार, प्रियंका मेहता, रोशनी चढ्ढा, खुशबू कुमारी व चांदनी कुमारी मौजूद रहे.

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