फल्गु की मुक्ति के लिए समाज आगे आये, करें कारसेवा : उमा भारती

Updated at : 29 Sep 2019 3:01 AM (IST)
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फल्गु की मुक्ति के लिए समाज आगे आये, करें कारसेवा : उमा भारती

साक्षात्कारl गया पहुंचीं भाजपा नेत्री ने ‘प्रभात खबर’ के साथ की विशेष बातचीत कहा- फल्गु के पारंपरिक स्रोतों को जिंदा करने में समाज के लोग निभाएं भूमिका सनातन परंपरा की मिसाल है गयाजी विश्व का है अलौकिक स्थान गया : फल्गु सनातन धर्म के मजबूत स्तंभों में से एक है. यह नदी आस्था और विश्वास […]

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साक्षात्कारl गया पहुंचीं भाजपा नेत्री ने ‘प्रभात खबर’ के साथ की विशेष बातचीत

कहा- फल्गु के पारंपरिक स्रोतों को जिंदा करने में समाज के लोग निभाएं भूमिका
सनातन परंपरा की मिसाल है गयाजी विश्व का है अलौकिक स्थान
गया : फल्गु सनातन धर्म के मजबूत स्तंभों में से एक है. यह नदी आस्था और विश्वास की प्रतीक है. यह गया जी की पहचान है. दुख की बात है कि आज यह नदी कई मुश्किलों से घिरी है. इस नदी को सूखे से मुक्ति दिलानी होगी. यह काम केवल सरकार के भरोसे नहीं होगा. समाज का हर वह वर्ग, जो फल्गु में आस्था रखता है,चाहे वह गया जी का निवासी हो या देश-विदेश के किसी हिस्से का.
उन सभी को आगे आना होगा. फल्गु को सूखे से मुक्ति दिलाने के लिए समाज के लोगों को एक कारसेवा करनी होगी. यह कारसेवा फल्गु को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जरूरी है.
पिछले दो दिनों से गया में प्रवास कर रही भाजपा की वरीय नेत्री उमा भारती ने शनिवार को सर्किट हाउस में प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में उक्त बातें कहीं. उन्होंने कहा कि फल्गु में पानी रहे इसके लिए जरूरी है कि इस नदी के तमाम जल स्रोत, चाहे वह आहर हों, पईन या पोखर हों सभी को फिर से जीवित करना होगा. कारसेवा इसी के लिए जरूरी है. हजारों लोग मिल कर इन जल स्रोतों को अतिक्रमण से मुक्त कर देंगे, तो फल्गु को सूखे से मुक्ति मिल जायेगी. उन्होंने कहा कि लोग इस पर मंथन करें.
अलौकिक है गयाजी की महिमा : उन्होंने बताया कि वह 1991 से गया आती रही हैं. कईबार आयी हैं. लेकिन यहां के सनातन की परंपरा को पहली बार करीब से देखा और जाना. उन्होंने कहा कि गया जी के मंदिर, यहां के पंडे, गलियां, घाट बताते हैं कि यहां सनातन धर्म और परंपरा सर्वश्रेष्ठ भूमिका में है. उन्होंने कहा, गया एक अलौकिक स्थान है. यह मिसाल है कि भारत अपने धर्म और परंपरा के लिए विश्व में पूजनीय है. विश्व की सभ्यताएं नष्ट हो गयीं, लेकिन भारत के लोगों ने अपनी परंपरा और धर्म को आज भी जीवित रखा है. उन्होंने कहा कि वह स्वयं को गया आने के लिए भाग्यशाली मानती हैं.
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