गया में सुखाड़ की समीक्षा के दौरान बोले मुख्यमंत्री, धान पर न रहें निर्भर, मौसम के अनुसार फसल लगाएं

Updated at : 02 Sep 2019 8:03 AM (IST)
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गया में सुखाड़ की समीक्षा के दौरान बोले मुख्यमंत्री, धान पर न रहें निर्भर, मौसम के अनुसार फसल लगाएं

गया/पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के किसानों को अब सिर्फ धान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्हें बदलते मौसम के अनुरूप फसलों की बुआई करनी चाहिए, तभी कम बारिश से जो नुकसान झेलना पड़ रहा है, उसमें कमी आयेगी. मुख्यमंत्री ने रविवार को समाहरणालय सभाकक्ष में गया जिले में सुखाड़ की […]

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गया/पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के किसानों को अब सिर्फ धान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्हें बदलते मौसम के अनुरूप फसलों की बुआई करनी चाहिए, तभी कम बारिश से जो नुकसान झेलना पड़ रहा है, उसमें कमी आयेगी.
मुख्यमंत्री ने रविवार को समाहरणालय सभाकक्ष में गया जिले में सुखाड़ की स्थिति की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से पिछले दो वर्षों से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो रही है, ऐसे में हमें किसानों को वैकल्पिक फसल के लिए प्रेरित करना होगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ की तरह ही हमलोग सूखा पीड़ित इलाकों को भी मदद करते रहे हैं और इस बार भी पंचायतों से रिपोर्ट मांगी गयी है, ताकि सूखा पीड़ित किसानों को मदद दी जा सके. उन्होंने कहा कि हमलोग इस साल अपनी क्षमता से आगे बढ़ कर मदद कर रहे हैं, लेकिन हमें बदलते मौसम को देखते हुए फसल चक्र को भी बदलना पड़ेगा. मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के सचिव को फसल चक्र का फाइनल प्रस्ताव लाने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि किस जिले में किस फसल की बुआई उपयुक्त होगी, इसका भी अध्ययन सुनिश्चित करें. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत भी लोगों को बदलते मौसम में वैकल्पिक फसल की बुआई के प्रति समझाया जायेगा. नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में 76% लोग कृषि पर निर्भर है.
जिस प्रकार से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो रही है, ऐसे में अगर उन्हें समझाया जाये तो वैकल्पिक फसल अपने खेतों में लगाने के लिए सहमत हो जायेंगे. मुख्यमंत्री ने गिरते भूजल स्तर पर भी चिंता व्यक्त की.
उन्होंने गया के डीएम को निर्देश दिया कि जिले में कितने आहर, पइन, सार्वजनिक कुआं, तालाब और पहाड़ी इलाके के हैं, उन्हें अतिशीघ्र चिह्नित करें. उन्होंने कहा कि नल का जल लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा है. ऐसे में जल का दुरुपयोग नहीं हो, यह लोगों को समझाना पड़ेगा.
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री और गया जिला प्रभारी मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, कृषि मंत्री प्रेम कुमार, गया के सांसद विजय मांझी, जहानाबाद के सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, गया जिले के विधायक व विधान पार्षद, मुख्य सचिव दीपक कुमार, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, राजस्व विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.
कृषि विभाग को निर्देश, फसल चक्र का फाइनल प्रस्ताव लाएं
बाढ़ से नुकसान
पटना : केंद्रीय टीम के निर्देश पर कल संशोधित प्रस्ताव भेजेगी राज्य सरकार
पटना : राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्रीय टीम के निर्देश पर राज्य सरकार मंगलवार को नया प्रस्ताव भेजेगी. पहले शुरुआती आकलन के बाद राज्य सरकार ने 2700 करोड़ रुपये की सहायता का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, लेकिन केंद्रीय टीम ने स्थल निरीक्षण के बाद अधिक नुकसान की आशंका जतायी है.
अब नये प्रस्ताव में विशेष तौर पर प्रत्येक प्रखंड में कृषि को नुकसान और सड़क क्षति का उसकी लंबाई के अनुसार विस्तृत विवरण शामिल होगा. रविवार को आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थल निरीक्षण कर लौटी केंद्रीय टीम के सभी अधिकारी भी मौजूद थे. सात सदस्यीय अंतरमंत्रालयी टीम का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमेश कुमार कर रहे हैं. नये प्रस्ताव पर ही केंद्र सरकार बिहार को सहायता देने का निर्णय करेगी.
प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि सात सदस्यीय केंद्रीय टीम ने सीतामढ़ी, मधुबनी और दरभंगा जिलों में एक-एक दिन रुक कर बाढ़ से हुए नुकसान की जानकार ली. उन्होंने बताया कि अब तक 22.90 लाख बाढ़पीड़ित परिवारों को छह-छह हजार रुपये उनके बैंक खातों में भेजा जा चुका है. इसके तहत 1,374 करोड़ रुपये बंट चुके हैं.
करीब दो लाख अन्य पीड़ित परिवार बचे हैं, जिन्हें यह अनुग्रह अनुदान देना है. केंद्र को भेजे गये प्रस्ताव के बारे में प्रत्यय अमृत ने बताया कि कृषि के क्षेत्र में 354 करोड़, सड़क में 332 करोड़, जल संसाधन विभाग के 306 करोड़, ग्रामीण कार्य विभाग के 18 करोड़, बिजली के 15 करोड़, पीएचइडी के तीन करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान था.
साथ ही सामुदायिक किचन के लिए 30.03 करोड़, रिलीफ सेंटर के लिए 2.90 करोड़, एयर ड्रॉप के लिए 3.40 करोड़, आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 70 लाख, तालाब की मरम्मत के लिए 12 करोड़, खेतों से गाद हटाने के लिए 35 करोड़, पीड़ितों को कपड़े के लिए 9.19 करोड़, गृह क्षति को लेकर 42.83 करोड़ और आबादी निष्क्रमण के लिए 6.30 करोड़ रुपये प्रस्ताव में शामिल हैं. बाढ़ से 13 जिले पीड़ित हुए, जिनमें से सीतामढ़ी, मधुबनी और दरभंगा में अधिक नुकसान बताया गया है.
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