पानी की शुद्धता की जांच करेगा वाटर क्वालिटी वैन
Updated at : 22 Aug 2018 7:42 AM (IST)
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गया : गया जिला फ्लोराइड प्रभावित है. यहां 266 से भी ज्यादा क्षेत्र हैं, जहां फ्लोराइड मानक से अधिक है. ऐसे में यहां सरकार द्वारा मिनी जलापूर्ति योजना चलायी जा रही है. सौर्य ऊर्जा से चलनेवाली इस योजना में ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये शुद्ध पानी लोगों को मुहैया कराया जा रहा है. लेकिन, इस योजना […]
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गया : गया जिला फ्लोराइड प्रभावित है. यहां 266 से भी ज्यादा क्षेत्र हैं, जहां फ्लोराइड मानक से अधिक है. ऐसे में यहां सरकार द्वारा मिनी जलापूर्ति योजना चलायी जा रही है. सौर्य ऊर्जा से चलनेवाली इस योजना में ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये शुद्ध पानी लोगों को मुहैया कराया जा रहा है.
लेकिन, इस योजना का लाभ लोगों को कितना पहुंच रहा है, इसकी जांच के लिए पीएचईडी पटना ने गया में वाटर क्वालिटी वैन भेजा है. यह वैन मिनी जलापूर्ति योजना के तहत सप्लाई हो रहा पानी का नमूना इकट्ठा करेगा व इसकी एक रिपोर्ट सरकार को देगा.
कहां-कहां चल रही मिनी जलापूर्ति योजना : पीएचईडी के अधिकारियों की मानें तो अभी गया नगर, बोधगया, डोभी व मानपुर में मिनी जलापूर्ति योजना चल रही है. यह वैन उन्हीं प्रखंडों में जायेगी. मिनी जलापूर्ति योजना के जरिये सरकार हजारों लोगों को शुद्ध पानी मुहैया करा रही है. ऐसे में उनका फीडबैक भी लिया जायेगा. पीएचईडी के अभियंताओं को भी निर्देश दिया गया कि वह भी इस काम में अपना पूरा सहयोग दें.
पिछले वर्ष भी इकट्ठा किया गया था नमूना : पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता विवेक कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष भी इस वैन के द्वारा जिले में पानी के नमूनों की जांच की गयी थी. इसके अनुसार जिले में अब भी फ्लोराइड का खतरा बना हुआ है. गौरतलब है कि दो वर्ष पूर्व कोलकाता की एक एजेंसी द्वारा जब यहां सभी चापाकलों से निकलने वाले जल के नमूने की जांच हुई थी, तो 20 हजार से ज्यादा चापाकलों का पानी फ्लोराइड युक्त पाया गया था.
वक्या है वाटर क्वालिटी वैन
पीएचईडी का वाटर क्वालिटी वैन चलता-फिरता लैब है. इसमें पानी की जांच करने के लिए सभी आधुनिक उपकरण लगे हैं. इसमें तकनीशियन की टीम भी रहती है. इस वैन में फ्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन समेत दूसरे खतरनाक तत्वों की जांच होती है. दंडीबाग स्थित पीएचईडी की वाटर टेस्टिंग लैब के शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि अमूमन इस लैब में तकनीशियनों द्वारा पानी का नमूना चापाकलों व नलों से लिया जाता है. इसके बाद संबंधित लेवल के अनुसार इसकी जांच होती है.
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