निरंजना नदी का फ्रंट बनाया जायेगा मनोरम
Updated at : 03 Aug 2018 6:00 AM (IST)
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बोधगया/पटना : बोधगया की निरंजना नदी के फ्रंट को विकसित करने की योजना पर पर्यटन विभाग ने काम शुरू कर दिया है. इसके तहत नदी से जुड़े उन सभी स्थलों और नदी के प्रमुख हिस्से को विकसित किया जायेगा. महाबोधि मंदिर, महंथ कोठी समेत अन्य प्रमुख स्थानों के पास से गुजरनेवाली इस नदी के प्रमुख […]
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बोधगया/पटना : बोधगया की निरंजना नदी के फ्रंट को विकसित करने की योजना पर पर्यटन विभाग ने काम शुरू कर दिया है. इसके तहत नदी से जुड़े उन सभी स्थलों और नदी के प्रमुख हिस्से को विकसित किया जायेगा. महाबोधि मंदिर, महंथ कोठी समेत अन्य प्रमुख स्थानों के पास से गुजरनेवाली इस नदी के प्रमुख किनारों को खासतौर से विकसित किया जायेगा.
इससे संबंधित प्रस्ताव पर्यटन विभाग तैयार कर रहा है. इस पर मंथन का कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि प्रमुख स्थानों पर रिवर फ्रंट तैयार करने की सशक्त रणनीति तैयार की जा सके और इस योजना को सही से जमीन पर उतारा जा सके. फिलहाल विभाग में उच्च स्तर पर इस प्रस्ताव को लेकर गहन विचार-विमर्श चल रहा है.
निरंजना ऐतिहासिक नदी है. कहा जाता है कि बुद्ध काल के दौरान इसमें प्रचुर मात्रा में पानी बहता था. इसलिए इसका नाम निरंजना पड़ा था. लेकिन, समय के साथ इसमें पानी का बहाव काफी कम होते चला गया और वर्तमान में इसमें नहीं के बराबर पानी है. इस वजह से नदी का किनारा काफी दूरी तक सूख जाने के कारण कुछ प्रमुख हिस्सों के किनारे की जमीन या फ्रंट को खूबसूरत तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव है.
लैंड स्केप व पौधारोपण किया जायेगा
नदी के प्रत्येक तीन-तीन किमी की दूरी पर के स्थानों को विकसित किया जायेगा. आधा से एक किमी के इलाके में यह रिवर फ्रंट विकसित करने का प्रस्ताव है. इन स्थानों में लैंड स्केप, पौधारोपण कर सुंदर पार्क की तरह विकसित किया जायेगा. इसके अलावा पूरी जमीन में 30 से 35 फीसदी हिस्से को कॉमन स्पेस या आम लोगों के उपयोग के लिए तैयार किया जायेगा.
जबकि कुछ स्थानों पर 60 फीसदी हिस्से को बेहद आधुनिक तरीके से विकसित करने का प्रस्ताव है. इन स्थानों पर बेहतरीन होटल समेत अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करने की योजना है. जहां रिवर फ्रंट विकसित किया जायेगा, वहां नदी की गहराई तक खोद कर यहां आनेवाले पानी को ज्यादा समय तक रोक कर रखने पर विचार किया जा रहा है.
हालांकि इस प्रस्ताव से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जायेगा. इसके अलावा विष्णुपद मंदिर के पास उस स्थान को खासतौर से विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां पितृपक्ष के समय में पिंडदान का आयोजन होता है. यहां आनेवाले सभी लोगों के लिए सभी तरह की सुविधाएं और अन्य जरूरी बातों को विकसित किया जायेगा.
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