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27 वर्षों में नेताओं ने मगध के युवाओं को बनाया नक्सली : पप्पू यादव

Updated at : 24 Oct 2017 9:43 PM (IST)
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27 वर्षों में नेताओं ने मगध के युवाओं को बनाया नक्सली : पप्पू यादव

गया : जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मधेपुरा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने मगध प्रमंडल की अराजक स्थिति के लिए यहां के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया. यहां मंगलवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों के साथ बात करने के दौरान उन्होंने मगध की बदहाली को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी. […]

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गया : जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मधेपुरा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने मगध प्रमंडल की अराजक स्थिति के लिए यहां के नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया. यहां मंगलवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों के साथ बात करने के दौरान उन्होंने मगध की बदहाली को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी.

पप्पू यादव ने कहा कि मगध यदि आज नक्सलवाद से मुक्त नहीं हो पा रहा है, तो उसका एक मात्र कारण है यहां के नेता और राज्य की सरकारें. 27 वर्षों में नेताओं ने समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के युवकों को केवल नक्सली बनाया. उनके हाथों में कलम की जगह हथियार थमाये गये. वह भी केवल अपने फायदे के लिए. किसी भी नक्सली को कभी मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश नहीं की गयी, क्योंकि उनके जरिये ही यहां के नेता अपने चुनाव का पैसा जुटाते हैं.

सांसद पप्पू यादव ने कहा कि नक्सलियों को लेवी वसूलने की पूरी छूट दी जाती है. इसमें प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग होता है. यह सभी पैसे नेता अपने फायदे के लिए प्रयोग करते हैं.

नक्सली के नाम पर हुए कई फर्जी एनकाउंटर
सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मगध मेें 20 वर्षों में सरकार और प्रशासन के लोगों ने नक्सली के नाम पर कई फर्जी एनकाउंटर कराया. पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रहें, जिनके खिलाफ कहीं भी मामला नहीं है और उनका एनकाउंटर कर दिया गया.पप्पू यादव ने कहा कि वैसे लोगों के परिवार को उनकी तरफ से 25 हजार रुपये और एक सदस्य को रोजगार मुहैया कराया जायेगा. इसके अलावा दिसंबर में डुमरिया से औरंगाबाद तक के क्षेत्र में मोटरसाइकिल यात्रा निकाली जायेगी. उन्होंने कहा कि नेताओं ने अपने फायदे के लिए लोगों को नक्सली बनाया और अपने ही फायदे के लिए नक्सली के नाम पर कई लोगों का एनकाउंटर भी करा दिया.

मगध की जनता को चाहिए आजादी
उन्होंने कहा कि मगध दिनों दिन दबंगों व माफियाओं के चंगुल में फंसता जा रहा है. लेवी के लिए मौत, शोषण हो रहे हैं. इस परिस्थिति के लिए यहां की राजनीतिक पार्टियां की जिम्मेदार हैं. अपराधी, माफिया व दलाल इन नेताओं के तैयार किये हुए हैं. इनका इस्तेमाल राजनीति के लिए होता है. इनके भरोसे से ही चुनाव लड़ा जाता है. इन लोगों को नेताओं ने लोकतंत्र का नायक बना दिया है. माफिया और दलालों की वजह से ही मगध में कोई भी योजना पूरी नहीं होती. लोगों को लाभ नहीं मिलता है.

पप्पू यादव ने कहा कि मगध की जनता इन सभी चीजों से आजादी चाहती है. यहां के लोग भ्रष्ट राजनेता, बेईमान अधिकारी और माफियाओं से आजादी चाहते हैं. इसके लिए जन अधिकारी पार्टी जल्द ही संघर्ष शुरू करेगी. नौ नवंबर को पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाॅल में युवा क्रांति संवाद कार्यक्रम होगा, जिसमें आंदोलन की रूप रेखा तैयार होगी.

जाति व धर्म में बंटा समाज कैसे हो सकता है देशभक्त
सांसद पप्पू यादव ने देश के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बिल्कुल सही है. देशभक्ति मापने की चीज नहीं है. छाती पर तिरंगा लगा कर चलने वाला ही देशभक्त है और बाकी लोग नहीं हैं, ऐसा नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि जब हमें हमारे घर से मिले संस्कार देशभक्त नहीं बना सके, तो सिनेमाघर में राष्ट्रगान के वक्त खड़े होकर हम कैसे देशभक्त हो सकते हैं.

पप्पू यादव ने कहा कि सही तरीके से देखें तो इस देश में कोई भी देशभक्त नहीं है. उन्होंने कहा कि हम सब पूरी जाति और धर्म में बंधे हैं. हम सभी उन्मादी, हम हिंदू-मुसलमान, यादव और राजपूत हैं. इन सब में देशभक्ति के लिए जगह कहां बचती है. जाति और धर्म में बंटा समाज कभी भी देशभक्त नहीं हो सकता है.

धर्म की मार्केटिंग बंद हो
पप्पू यादव ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर यज्ञ के विरोधी हैं. उन्होंने कहा कि जिस देश में हर रोज लाखों लोग भूखे सोते हैं, भूख से मर जाते हैं, वहां यज्ञ करने से बेहतर है कि उस पैसे से किसी भूखे काे भोजन करा दिया जाये. उन्होंने कहा कि इंसानों द्वारा बनाये गये भगवान मानवता के लिए सबसे बड़े दुश्मन हैं. उन्होंने कहा कि धर्म की मार्केटिंग पूर्ण रूप से बंद होनी चाहिए. धर्म और पूजा पूरी तरह से अंतर मन की श्रद्धा है. इसका आडंबर नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि महात्मा बुद्ध और साई बाबा ने अपने पूरे जीवन मूर्ति और आडंबर का विरोध किया, आज उनके अनुयायी उनकी मूर्तियां लगवाने के लिए बेचैन हैं. लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, यह कैसी पूजा और भक्ति है.

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