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मेडिकल में लड़कियों के आरक्षण से लड़कों के लिए कंपीटीशन हुआ और मुश्किल, पिछले वर्ष भी 40 प्रतिशत सीटों पर था छात्राओं का कब्जा

Updated at : 05 Jun 2021 11:37 AM (IST)
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मेडिकल में लड़कियों के आरक्षण से लड़कों के लिए कंपीटीशन हुआ और मुश्किल, पिछले वर्ष भी 40 प्रतिशत सीटों पर था छात्राओं का कब्जा

नीट 2020 में बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा बोर्ड (बीसीइसीइबी) की ओर से बिहार स्टेट मेधा सूची के अनुसार टॉप के 1000 स्टूडेंट्स में 612 छात्र तथा 388 छात्राएं शामिल थीं. मेधा सूची में छात्राओं की भागीदारी 39 प्रतिशत रही.

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पटना. नीट 2020 में बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा बोर्ड (बीसीइसीइबी) की ओर से बिहार स्टेट मेधा सूची के अनुसार टॉप के 1000 स्टूडेंट्स में 612 छात्र तथा 388 छात्राएं शामिल थीं. मेधा सूची में छात्राओं की भागीदारी 39 प्रतिशत रही.

यह प्रतिशत इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मेधा सूची के प्रथम एक हजार रैंक में 388 छात्राएं शामिल थीं. वहीं, एडमिशन में करीब छात्राओं की भागीदारी 40 प्रतिशत रही.

लड़कों के लिए मेडिकल का कंपीटीशन होगा मुश्किल

गोल संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर बिपिन सिंह ने बताया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में बिहार से 60 प्रतिशत से अधिक परीक्षार्थी लड़के होते हैं और मेडिकल कॉलेज में 60 प्रतिशत के लगभग लड़कों को एडमिशन प्राप्त होता है.

इस रिजर्वेशन पॉलिसी के लागू होने के बाद मेडिकल कॉलेजों में लड़कियों का एडमिशन जहां पहले 40 प्रतिशत के आस-पास होता था, वहीं अब 73 प्रतिशत या उससे अधिक होगा. ऐसे में लड़कों के लिए सिर्फ 27 प्रतिशत या उससे कम सीटों पर ही एडमिशन की संभावना होगी. ऐसे में छात्रों के लिए यह प्रतियोगिता काफी कठिन हो जायेगी.

33 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की जरूरत

बिपिन सिंह बताते हैं कि बिहार सरकार को इस पॉलिसी को लागू करने के पहले मेडिकल कॉलेज की 33 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि छात्राओं के हित में छात्रों का अहित न हो. किसी एक को नुकसान पहुंचा कर दूसरे को फायदा पहुंचाना उचित नहीं है. छात्राओं को लाभ जरूर मिले, लेकिन लड़कों को भी समान अवसर प्राप्त हो.

इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्राओं की संख्या कम

गोल संस्थान के असिस्टेंट डायरेक्टर रंजय सिंह ने कहा कि बिहार सरकार के इस कदम के बाद डॉक्टर और इंजीनियरिंग बनने का सपना देखने वाले बिहार की लाखों छात्राओं को खुशी मिलेगी. इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्राओं की संख्या काफी कम होती है, लेकिन मेडिकल कॉलेजों में इंजीनियरिंग की अपेक्षा लड़कियों की संख्या ज्यादा है.

रिजर्वेशन पॉलिसी लागू करने के पहले बढ़ायी गयी थी सीट

इसके पहले केंद्र द्वारा ओबीसी एवं इडब्ल्यूएस के छात्रों के लिए रिजर्वेशन पॉलिसी लागू करने के पहले मेडिकल कॉलेज की उतनी सीटें बढ़ायी गयी थीं, जितनी रिजर्वेशन पॉलिसी द्वारा छात्रों को दी जानी थी. उम्मीद है बिहार सरकार भी इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल करेगी.

स्टूडेंट बोले

मेडिकल की तैयारी कर रहे विवेक कुमार ने बताया कि इस न्यूज के आने के बाद मैं बहुत निराश हो गया हूं. पहले से ही बिहार में मेडिकल कॉलेजों में सीटें बहुत कम थीं. ऐसे में रिजर्वेशन लागू होने के बाद तो सीटें न के बराबर होंगी.

ऐसे में हमलोगों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. नीट की तैयारी में जुटे सुबोध ने बताया कि लगता है अब मेरा सपना, सपना बन कर ही रह जायेगा. वहीं नीट की तैयारी कर रही शिखा ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि अब दोगुनी उत्साह से तैयारी करूंगी.

Posted by Ashish Jha

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