DMCH के शिशु विभाग में बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा और तोड़फोड़, जाने पूरा मामला

Updated at : 12 Sep 2022 5:56 AM (IST)
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DMCH के शिशु विभाग में बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा और तोड़फोड़, जाने पूरा मामला

दरभंगा के डीएमसीएच के शिशु विभाग में रविवार को दो बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया. आक्रोशित परिजनों ने विभाग के बाहर मुख्य सड़क को जाम कर दिया. परिजनों का आरोप है कि चिकित्सा में लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हो गयी.

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दरभंगा के डीएमसीएच के शिशु विभाग में रविवार को दो बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया. आक्रोशित परिजनों ने विभाग के बाहर मुख्य सड़क को जाम कर दिया. परिजनों का आरोप है कि चिकित्सा में लापरवाही के कारण उनके बच्चे की मौत हो गयी. कहा कि मरीजों की चिकित्सा के बजाय चिकित्सक व नर्स मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं. उपचार ठीक से नहीं होने के कारण उनके बच्चों की मृत्यु हो गयी. इधर, घटना की सूचना मिलते ही अधीक्षक डॉ हरिशंकर मिश्रा, बेता ओपी अध्यक्ष उमेश उड़ाव विभाग पहुंचे. परिजनों से बात की. किसी तरह मामला शांत किया. सड़क से जाम को हटाया गया. विदित हो कि मृतकों में मधुबनी के अड़ेर निवासी 12 वर्षीय कृष्णा कुमार व एपीएम थाना के सिधौली गांव निवासी ढाई माह की अमरा शामिल थी.

20 दिनों से बच्चे को था बुखार

दोनों बच्चों को गंभीर अवस्था में यहां लाया गया था. कृष्णा के चाचा रंजीत मुखिया ने बताया कि भतीजा को 15-20 दिन से बुखार था. उसे अन्य अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था. उसे अन्य बीमारी थी. बताया कि चिकित्सकों के अनुसार उसके शरीर में खून नहीं बनता था. इसे लेकर उसे कई अस्पतालों में इलाज कराया गया. दिल्ली से लेकर पटना के अस्पतालों में उसका उपचार किया गया, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ. अंत में चिकित्सा के लिये उसे डीएमसीएच में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों ने बताया कि कृष्णा की स्थिति ठीक नहीं है. उसे अन्य जगह रेफर कर देते हैं, लेकिन परिजनों के कहने पर चिकित्सकों ने उसका उपचार जारी रखा. इलाज के क्रम में शुक्रवार की दोपहर बाद उसकी मौत हो गयी. इधर, ढाई माह की अमरा के बारे में बताया गया कि उसे सांस लेने में समस्या थी. पंजरा मार रहा था. चिकित्सकों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उसकी भी मृत्यु हो गयी.

मरीज की स्थिति पहले से थी गंभीर: अस्पताल

डीएमसीएच के अधीक्षक डॉ हरिशंकर मिश्रा ने कहा कि दोनों मरीजों की स्थिति पहले से ही गंभीर थी. चिकित्सकों ने हरसंभव कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली. वहीं 12 साल के कृष्णा की मौत के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. कृष्णा की मां व दादी के कारुणिक विलाप से वहां का माहौल गमगीन हो गया. परिजन व आसपास के लोग ढांढ़स बंधाने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि इस दौरान उन लोगों की भी आंखें नम हो रही थी. लाश को एंबुलेंस पर चढ़ाने के दौरान माहौल और गमगीन हो गया. 12 साल के कृष्णा की लाश को कंधे पर एंबुलेंस में ले जाने के दौरान परिसर में जुटी भीड़ का धैर्य जवाब दे गया. सभी की आंखे नम हो गयी.

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