बिहार में म्यूटेशन-परिमार्जन में देरी मानी जायेगी अपराध, काम को लटकाकर रखने वाले सीओ-कर्मी होंगे दंडित

Updated at : 15 Dec 2022 4:44 AM (IST)
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बिहार में म्यूटेशन-परिमार्जन में देरी मानी जायेगी अपराध, काम को लटकाकर रखने वाले सीओ-कर्मी होंगे दंडित

भूमि सुधार विभाग के मंत्री आलोक मेहता ने ऐलान किया है कि अब म्यूटेशन, परिमार्जन आदि विभाग के जितने भी काम हैं उनके आवेदनों के निस्तारण में जानबूझकर देरी अपराध माना जायेगा. अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर

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पटना: मुख्यमंत्री के दरबार में 70 फीसदी और अपने कार्यालय में प्रतिदिन 100 शिकायतें मिलने से नाराज राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री आलोक मेहता ने ऐलान किया है कि अब म्यूटेशन, परिमार्जन आदि विभाग के जितने भी काम हैं उनके आवेदनों के निस्तारण में जानबूझकर देरी अपराध माना जायेगा. सभी जिलों के डीएम-एडीएम को इस संबंध में राजस्व कर्मियों पदाधिकारियों की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है.

आंशिक साक्ष्य भी मिला, तो कार्रवाई तय है. आवेदनों का न्याय के साथ निस्तारण नहीं करने वाले सीओ- राजस्व कर्मी दंडित किये जायेंगे. सभी जिलों के डीएम – एडीएम को इस संबंध में राजस्वकर्मियों पदाधिकारियों की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. आंशिक साक्ष्य भी मिला तो कार्रवाई तय है.समयबद्धता और न्यायपूर्ण तरीके से आवेदनों का निस्तारण करने वाले 50 सीओ को पुरस्कृत किया जायेगा.

‘दो से तीन माह में लंबित मामलों का निस्तारण करना है’

श्री मेहता ने बुधवार को अपने कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दो से तीन माह में लंबित मामलों का निस्तारण करना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिकारी आवेदनों को खारिज कर दें. किसी भी आवेदन को निरस्त करने का वैध कारण देना होगा. जो अफसर ऐसा नहीं करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई हाेगी.

नौ सीओ को किया जा चुका है निलंबित

अब तक नौ सीओ को निलंबित किया गया है. 12 के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है. राजस्व मंत्री ने दो टूक कहा कि जनता की पेरशानी की कीमत पर अधिकारियों को बख्शा नहीं जायेगा. शिकायतें मिल रही हैं कि राजस्वकर्मी- पदाधिकारी लोगों सेे अच्छा व्यवहार नहीं करते. यह बहुत गंभीर मामला है.

लंबित मामले निस्तारित होने के बाद होगा नियमों में बदलाव

लंबित मामले निस्तारित कराना प्राथमिकता है. इसके साथ ही प्रशिक्षण पूरा कर राजस्वकर्मी पंचायतों में तैनात कर दिये जायेंगे. करीब 80 फीसदी पंचायत में कर्मचारी नियुक्त हो जायेंगे. इसके बाद जरूरी मामलों में नियम आदि बदलाव किया जायेगा. राजस्व कोर्ट विधिवत और समय से फैसला दें यह सुनिश्चित किया जायेगा.

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