Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी संस्कृत विभाग, वीएसजे कॉलेज, राजनगर तथा एमएलएस कॉलेज सरिसवपाही की ओर से जुबली हॉल में संस्कृत शास्त्र एवं उसके विविध आयाम विषय पर चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार रविवार को संपन्न हो गया. पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ घनश्याम महतो की अध्यक्षता में आयोजित सेमिनार में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व वेद विभागाध्यक्ष डॉ विनय कुमार मिश्र ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन शैक्षणिक यज्ञ-ज्ञान है. प्राच्य विद्या एवं संस्कृत शास्त्रों के संरक्षण व संवर्धन के लिए सेमिनार का आयोजन भगीरथ प्रयास है. संस्कृत मानव जीवन के सम्यक संचालन एवं संवर्धन करने में सक्षम है. यह संस्कार युक्त भाषा है, जो मधुर एवं गंभीर ज्ञान-विज्ञान सिखाती है. ऐसे शैक्षणिक अवसरों पर प्रतिभागियों द्वारा शोध-पत्र वाचन सदैव प्रेरणास्पद एवं ज्ञानवर्धक होता है. वहीं आयोजन सचिव प्रो. जीवानन्द झा ने कहा कि सेमिनार में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया. 296 ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया. संयोजक डॉ कृष्णकान्त झा ने कहा कि वैदिक मंत्रों में दैवीय शक्ति होती है, जिससे हमारा जीवन बेहतर होता है. डॉ रीतेश कुमार चतुर्वेदी ने संस्कृत को देववाणी एवं लोक हितकारी बताया. डॉ घनश्याम महतो ने बेहतर शोध-पत्रों की जांच कर उन्हें आइएसबीएन युक्त सम्पादित ग्रन्थ में प्रकाशित किए जाने की बात कही. उन्होंने जिन प्रतिभागियों ने अभी तक पूर्ण शोधालेख जमा नहीं किया है, उन्हें इस माह के अंत तक विभाग में अनिवार्य रूप से जमा करने का आग्रह किया. धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ आरएन चौरसिया ने कहा कि समाज के निर्माण व सकल विकास में संस्कृत चरित्र-निर्माण को बढ़ावा देती है. डॉ मोना शर्मा ने संस्कृत साहित्य को अत्यधिक समृद्ध बताया और भावी पीढ़ी को अपनी सभ्यता, संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़कर व संजोकर जीने के लिए प्रेरित किया. समापन सत्र में प्रतिभागियों को पत्र प्रस्तुति तथा सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किया गया.
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