गुणवत्ता से बढ़ेगी मखाना की वैश्विक पहचान, किसान समृद्धि-गुणवत्ता मंथन कार्यक्रम आयोजित

मखाना अनुसंधान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में मंचाशीन वैज्ञानिक
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र और भारतीय गुणवत्ता परिषद ने 'किसान समृद्धि-गुणवत्ता मंथन' कार्यक्रम आयोजित किया. इसका उद्देश्य मखाना उत्पादन में गुणवत्ता और मशीनीकरण को बढ़ावा देना है ताकि किसानों को बेहतर मूल्य और वैश्विक बाजार में पहचान मिल सके.
Darbhanga News: राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा एवं भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को 'किसान समृद्धि-गुणवत्ता मंथन' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले और भारतीय गुणवत्ता परिषद के संयुक्त निदेशक अमित सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
गुणवत्ता और मशीनीकरण से किसानों को मिलेगा लाभ
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा कि मखाना उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण तक प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मखाना की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि मशीनीकरण से श्रम की आवश्यकता कम होगी, स्वच्छ एवं वैज्ञानिक प्रसंस्करण संभव होगा तथा निर्यात योग्य गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे. उन्होंने उद्योग में स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों के पालन पर विशेष जोर दिया.
गुणवत्ता संस्कृति से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भारतीय गुणवत्ता परिषद के संयुक्त निदेशक अमित सिंह ने परिषद की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि गुणवत्ता संस्कृति, मानकीकरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से मखाना क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलेगी.
विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी सुझाव
कार्यक्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी नीरज कुमार झा ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आई.एस. सिंह ने वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, एपीडा के एजीएम निरंजन रेड्डी ने निर्यात गुणवत्ता तथा सीफेट, लुधियाना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. विश्वकर्मा ने मखाना प्रसंस्करण में मशीनीकरण की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला.
गुणवत्ता को कार्यशैली का हिस्सा बनाने का लिया संकल्प
किसान संवाद सत्र का संचालन वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने किया. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने गुणवत्ता को अपनी कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम का संचालन शिवम शुक्ला एवं मो. सलीम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अमित सिंह ने दिया.
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