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Darbhanga News: मकर संक्रांति पर्व 14 को, सज गया बाजार

Updated at : 04 Jan 2026 9:50 PM (IST)
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Darbhanga News: मकर संक्रांति पर्व 14 को, सज गया बाजार

Darbhanga News:प्रकृति के साहचर्य एवं धार्मिक विधान के लिए महत्वपूर्ण लोकपर्व मकर संक्रांति अगले 14 जनवरी को मनाया जायेगा.

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Darbhanga News: दरभंगा. प्रकृति के साहचर्य एवं धार्मिक विधान के लिए महत्वपूर्ण लोकपर्व मकर संक्रांति अगले 14 जनवरी को मनाया जायेगा. इसके लिए बाजार तैयार हो गया है. जगह-जगह लाई के साथ ही गुड़ की दुकानें सज गयी हैं. खरीदार भी पहुंचने लगे हैं. तिल के साथ ही चूड़ा व मुरही की लाई तैयार करने के लिए महिलाएं मौसम में सुधार की राह देख रही है. कड़ाके की ठंड के कारण लोगों के घर से बाहर नहीं निकलने की वजह से बाजार में इस पर्व से जुड़ी सामग्रियों की बिक्री में अभीतक अपेक्षित गति नहीं आ सकी है. मौसम में सुधार होते ही बिक्री बढ़ने की उम्मीद में कारोबारी दुकान सजाये बैठे हैं. उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष देवता सूर्य कर्क से मकर रेखा में प्रवेश करते हैं. इस संक्रमण काल को आध्यात्मिक दृष्टि से अहम माना गया है. यही वजह है कि इस दिन पवित्र घाटों पर पुण्य स्नान के साथ ही दान का विशेष महत्व है. इस नजरिए से जहां एक तरफ श्रद्धालुओं ने पश्चिम बंगाल के गंगासागर के साथ ही सिमरिया आदि घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने की योजना बना रखी है, वहीं दान के लिए सामग्री का प्रबंध भी कर रहे हैं.

रेडिमेड लाई का बढ़ा चलन

इस पर्व के मौके पर चूड़ा और मुरही के साथ तिल की गुड़ वाली लाई का चलन है. पहले तो अधिकांश परिवार में घर में ही लाई तैयार की जाती थी. महिलाएं चूड़ा व मुरही भूनकर गुड़ की चासनी में डाल लाई बनाती थी. वहीं तिल को पहले धोकर सूखाती थी और इसके बाद लाई तैयार करती थी. अब तो रेडिमेड लाई से ही काम चलाया जाता है. बावजूद अभी भी कई घरों में महिलाएं अपने हाथ से लाई बनाती हैं. ये महिलाएं मौसम में सुधार यानी धूप खिलने का इंतजार कर रही हैं.

स्टॉक फुल

त्योहार को लेकर बाजार में गल्ला कारोबारियों ने जहां चूड़ा, मुरही व तिल का स्टॉक फुल कर रखा है, वहीं लाई की दुकानें भी सज गयी हैं. बाहर से कारोबारी पहुंच गये हैं, जो तिलकुट तैयार कर रहे हैं. तरह-तरह के स्वाद में तिलकुट बाजार में मिल रहे हैं.

चूड़ा व मुरही की लाई पर महंगाई का असर नहीं

बाजार पर इस बार महंगाई का बहुत अधिक असर नजर नहीं आ रहा. चूड़ा तथा मुरही की लाई के दाम पिछले साल की ही तरह 120 रुपये किलो है तो तिल की लाई की कीमत में थोड़ा सा उछाल दिख रहा है. 300 से 350 रुपये किलो मिलने वाली तिल की लाई इस बार 350 से 400 रुपये किलो मिल रही है. बादाम पापड़ी 250 रुपये किलो तो तिलकुट 250 से 350 रुपये किलो उपलब्ध है. इसमें तरह-तरह की वेराइटी मिल रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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