प्रस्तावित शिक्षा विधेयक पर एलएनमूटा की आपत्ति, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (एलएनमूटा) ने बिहार सरकार के प्रस्तावित शिक्षा विधेयक पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के अधिकारों पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों को लेकर पुनर्विचार का आग्रह किया है.
Darbhanga News: बिहार सरकार के प्रस्तावित शिक्षा विधेयक को लेकर विश्वविद्यालय शिक्षकों की चिंताएं सामने आने लगी हैं. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (एलएनमूटा) के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति को ज्ञापन भेजकर विधेयक के चर्चित प्रावधानों पर पुनर्विचार करने तथा उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखने का आग्रह किया है.
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होने की जताई आशंका
एलएनमूटा के महासचिव डॉ. नीलेश कुमार और अध्यक्ष डॉ. शशि भूषण कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में 15 जुलाई एवं 18 जुलाई को विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रस्तावित शिक्षा विधेयक के तहत अंगीभूत और नवस्थापित कॉलेजों पर उच्च शिक्षा विभाग को प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण देने तथा विश्वविद्यालयों की भूमिका को मुख्य रूप से स्नातकोत्तर शिक्षण तक सीमित करने की बात सामने आई है.
नियुक्ति और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर चिंता
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति, सेवा संबंधी नीतिगत निर्णय तथा कॉलेज प्रशासन का नियंत्रण सीधे उच्च शिक्षा विभाग के हाथ में चला जाता है, तो इससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शिक्षकों के अधिकारों का उठाया मुद्दा
एलएनमूटा ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि प्रस्तावित विधेयक में उच्च शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति, शिक्षकों की राजनीतिक गतिविधियों एवं सार्वजनिक अभिव्यक्ति पर संभावित प्रतिबंध तथा कॉलेज शिक्षकों को विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोन्नति से वंचित करने जैसे प्रावधानों को लेकर चिंता जताई जा रही है. प्रतिनिधियों का कहना है कि विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता उच्च शिक्षा की आधारशिला है तथा इन पर किसी भी प्रकार का अंकुश शिक्षण एवं शोध के वातावरण को प्रभावित कर सकता है.
कुलाधिपति से पुनर्विचार का आग्रह
प्रतिनिधियों ने कुलाधिपति से अनुरोध किया है कि बिहार के विश्वविद्यालयों के संरक्षक के रूप में वे इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और ऐसे प्रावधानों पर पुनर्विचार सुनिश्चित करें, जो शिक्षकों के अधिकारों, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है.
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