Darbhanga News: हिंदी सिर्फ बुद्धिजीवी वर्ग की भाषा नहीं, यह भारत के आमजनों की भाषा

Updated at : 13 Sep 2025 10:33 PM (IST)
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Darbhanga News: हिंदी सिर्फ बुद्धिजीवी वर्ग की भाषा नहीं, यह भारत के आमजनों की भाषा

Darbhanga News: लनामिवि के पीजी हिंदी विभाग में शनिवार को ''''ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में राजभाषा हिंदी की महत्ता'''' विषय पर परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी हुई.

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Darbhanga News: दरभंगा. हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर लनामिवि के पीजी हिंदी विभाग में शनिवार को ””””””””ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में राजभाषा हिंदी की महत्ता”””””””” विषय पर परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि हिंदी सिर्फ बुद्धिजीवी वर्ग की ही भाषा नहीं, बल्कि यह भारत के आमजनों की भाषा है. भले ही हिंदी संवैधानिक रूप से भारत की राष्ट्रभाषा घोषित हो या नहीं, लेकिन इसकी लोकप्रियता के कारण सभी इसे भारत की राष्ट्रभाषा ही मानते हैं. हिंदी अन्य देशों में भी बोली जाती है. मॉरीशस की अत्यधिक आबादी अपने बोलचाल में हिंदी का उपयोग करती है. भारत से जब गिरमिटिया मजदूर मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम आदि देश गए, तब हिंदी के लाखों बीज वहां बिखेर गए, जो आज फलफूल रहे हैं.

कोई भी भाषा एक-दूसरे की विरोधी नहीं होती- प्रो. मंजू

मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. मंजू राय ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसको याद करने के लिए किसी दिवस की आवश्यकता नहीं है. भला जिन लोगों के दिन की शुरुआत ही हिंदी से होती है, उसे किसी विशेष दिवस मनाने की क्या जरूरत है? कहा कि कोई भी भाषा एक-दूसरे की विरोधी नहीं होती है, इसलिए किसी भी भाषा बोलने वाले में आपस में बैर नहीं होना चाहिए.

जहां जितनी विविधता वहां विरोध भी उतना ही- प्रो. विजय

प्रो. विजय कुमार ने कहा कि वैसे तो भाषा का काम एक दूसरे से संपर्क करने का है, लेकिन जहां जितनी विविधता होती है, वहां पर विरोध भी उतना ही होता है, इसीलिए भाषा कहीं-कहीं तोड़ने का भी काम करती है. डॉ सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि हिंदी की दुर्दशा हिंदी बोलने वाले ही करते हैं. हिंदी भाषी को हिंदी बोलने में शर्मिंदगी महसूस होती है. डॉ आनंद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि भारतीय आर्यभाषा परिवार में हिंदी का विशेष महत्व रहा है.

किया गया कविता पाठ

मौके पर साहित्यकार हीरालाल सहनी और सूबेदार नंदकिशोर साह ने कविता प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में लक्ष्मण कुमार, धीरज कुमार, हरेकांत कुमार, सूरज नारायण महतो, खुशबू कुमारी, दुर्गानंद ठाकुर, कंचन कुमारी आदि ने स्वरचित कविता पाठ की. संचालन डॉ मंजरी खरे तथा धन्यवाद ज्ञापन बेबी कुमारी ने किया. काव्यपाठ करनेवाले एवं परिचर्चा में भाग लेनेवाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिया गया.

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