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Darbhanga News: कड़ाके की ठंड में भी गेहूं के पटवन में पसीना बहा रहे किसान

Updated at : 20 Dec 2025 10:48 PM (IST)
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Darbhanga News: कड़ाके की ठंड में भी गेहूं के पटवन में पसीना बहा रहे किसान

Darbhanga News:दो दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड व सर्द पछुआ हवा से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. लोग घरों से बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं.

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Darbhanga News: बहादुरपुर. दो दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड व सर्द पछुआ हवा से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. लोग घरों से बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं. वहीं इस कड़ाके की ठंड में भी किसान गेहूं के पटवन में जुटे हैं. अगात बोआई वाली गेहूं की फसल का पटवन करना आवश्यक है. किसान उसका पंपसेट व बिजली संचालित मशीनों से पटवन कर रहे हैं. किसान गेहूं की फसल के लिए इसे उपयुक्त समय बता रहे हैं. कहते हैं कि इसी तरह समय रहा तो गेहूं की अच्छी पैदावार होगी. हालांकि मक्के की पौधे की वृद्धि में कमी आने की आशंका है. इसके अलावा तेलहन, दलहन व आलू की फसल पर असर पड़ सकता है.

पौधा संरक्षण के सहायक निदेशक डॉ साहिद जमाल ने बताया कि इस कड़ाके की ठंड से गेहूं की फसल को काफी फायदा होगा, लेकिन आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गयी है. इसके अलावा तेलहन व दलहन फसल पीले पड़ सकते हैं. इन रोगों के वचाव के लिए किसानों को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है.

उल्लेखनीय है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में रबी के तहत विभिन्न फसलों का आच्छादन एक लाख 14 हजार 296.240 हेक्टेयर में करने का लक्ष्य रखा गया है. कृषि विभाग के अनुसार जिले में गेहूं का आच्छादन 33.47 प्रतिशत ही हो सका है. इसी प्रकार 36.91 प्रतिशत मक्का का आच्छान किया गया है.

फसल लक्ष्य आच्छादन(हेक्टेयर में)

गेहूं 89718 30030.600मक्का 11305.3 4173.300मसूर 6329.260 2699.900मटर 276.045 124.500सरसों 4942.430 2323.260चना 201.335 102.560दलहन 488.200 172.060

बिन मौसम खेती तकनीक किसानों के लिए अधिक लाभकारी

जाले. कृषि विज्ञान केंद्र में संरक्षित खेती तकनीक पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शनिवार को प्रमाण पत्र वितरण के साथ हो गया. समारोह की अध्यक्षता केंद्र के अध्यक्ष डॉ दिव्यांशु शेखर ने की. मौके पर उन्होंने कहा कि संरक्षित खेती या बिन मौसम खेती तकनीक किसानों के लिए अधिक लाभकारी है. इससे कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन और बेहतर आय संभव है. वहीं कार्यक्रम के समन्वयक मृदा व जल अभियंत्रण विशेषज्ञ इ. निधि कुमारी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को संरक्षित खेती तकनीक के महत्व व लाभ की जानकारी दी गयी. साथ ही पॉलीहाउस, नेट हाउस, लोटनल, हाइ टनल, शेड नेट हाउस जैसी संरचनाओं, उनकी लागत, उपलब्ध सब्सिडी एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गयी. इस दौरान ट्रेनिंग में दी गयी पूरी जानकारी उन्होंने मीडिया से साझा की. अंतिम दिन कृषि विज्ञान केंद्र लादा समस्तीपुर के अध्यक्ष डॉ सुनीता कुशवाहा ने पौध तैयार करने की चुनौतियों, फायदों तथा उपयुक्त फसल व किस्मों के चयन के बावत बताया. मौके पर गृह वैज्ञानिक डॉ पूजा कुमारी भी उपस्थित थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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