Darbhanga News: दरभंगा. बिहार राज्य संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर महासंघ की लनामिवि इकाई से जुड़े शिक्षाकर्मियों की बैठक बुधवार को डॉ महेश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई. इसमें विभिन्न मांगों को लेकर 30 जनवरी को विवि मुख्यालय पर धरना- प्रदर्शन का निर्णय लिया गया. बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कोरोना काल में तत्कालिक व्यवस्था के तहत माइनर विषयों की ओएमआर शीट पर आब्जेक्टिव प्रश्न आधारित परीक्षा ली जा रही थी, जो कोरोना काल के समाप्त होने के बाद भी जारी है. कहा कि इस पाठ्यक्रम में बदलाव लाकर पूर्व की स्थिति बहाल की जानी चाहिए. पूर्व की स्थिति बहाल करना छात्र एवं शिक्षक दोनों के लिए लाभकारी होगा. शिक्षकों ने कहा कि स्नात्तक की परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्याकंन दूसरे विश्वविद्यालय से कराने की परिपाटी पर रोक लगनी चाहिये. इससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है. कहा कि स्नातक स्तर की कापी का मूल्यांकन अपने ही विश्वविद्यालय में होना चाहिये.
केंद्राधीक्षक चहेतों को बनाते बाह्रय एवं आंतरिक परीक्षक
वक्ताओं ने कहा कि प्रायोगिक विषयों की परीक्षा में विवि अपनी परेशानी से बचाव के लिए बाह्रय एवं आंतरिक परीक्षकों की नियुक्ति के लिये केंद्राधीक्षकों को ही अधिकृत कर देता है. इस परिपाटी से केवल प्रधानाचार्य के नजदीकी शिक्षकों को ही लाभ मिल पाता है. अन्य शिक्षकों को इससे नुकसान हो रहा है. कहा कि प्रायोगिक परीक्षा के लिये आंतरिक एवं बाह्य परीक्षकों की नियुक्ति पूर्व की भांति विश्वविद्यालय स्तर से ही की जाय.
नामांकन मद की 50 प्रतिशत राशि का हो भुगतान
वक्ताओं ने उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के पारित न्यायादेश के आलोक में मांग की है कि राज्य सरकार संबद्ध काॅलेजों का अधिग्रहण कर यूजीसी वेतन, पेंशन एवं बकाया का भुगतान करे. नामांकन मद में आवेदन फीस का 50 प्रतिशत बकाया राशि संबद्ध काॅलेजों को अविलंब भुगतान किया जाये. पिछले कई सत्रों का रुपया विश्वविद्यालय दबाये बैठे है. बैठक में आरबी जालान कॉलेज के डॉ देवचन्द्र ठाकुर, एलसीएस कॉलेज के डॉ रामनन्दन राय, एमएमटीएम कॉलेज के डॉ कृष्ण कुमार सिंह, डॉ सुमन कुमार झा, डॉ भागीरथ चौधरी, डॉ अंजनी कुमार चौधरी आदि शामिल थे.
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