सहरसा-गंडौल मुख्य सड़क बनी हादसों का हॉटस्पॉट, सुरक्षा इंतजाम की मांग तेज

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प्रतीकात्मक AI तस्वीर

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सहरसा-गंडौल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क लगातार सड़क दुर्घटनाओं के कारण लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोग मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं.

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Biroul News: सुपौल कोठीपुल होते हुए सहरसा-गंडौल को जोड़ने वाली मुख्य सड़क लगातार सड़क दुर्घटनाओं के कारण लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने के बाद से इस मार्ग पर दर्जनों लोग हादसों में जान गंवा चुके हैं. लगातार हो रही दुर्घटनाओं से आसपास के गांवों में भय का माहौल है.

ग्रामीणों के अनुसार सड़क चौड़ी और बेहतर बनने के बाद वाहन तेज रफ्तार से दौड़ने लगे हैं, जबकि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम अब भी नहीं किए गए हैं.

स्पीड ब्रेकर और चेतावनी बोर्ड नहीं होने से बढ़ा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों से मुख्य सड़क पर जुड़ने वाले मोड़ों और क्रॉसिंग पर न तो स्पीड ब्रेकर लगाए गए हैं और न ही चेतावनी बोर्ड. रात में पर्याप्त रोशनी की भी व्यवस्था नहीं है. ऐसे में छोटे-छोटे मोड़ भी हादसों की वजह बन रहे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि सुपौल कोठीपुल, सोनपुर और आसपास के इलाकों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं. बाइक सवार, पैदल यात्री और साइकिल चालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. स्कूल जाने वाले बच्चे और बुजुर्ग सड़क पार करने में असुरक्षित महसूस करते हैं.

ब्लैक स्पॉट घोषित करने की मांग

ग्रामीण श्याम मोहन झा ने बताया कि सुबह और शाम स्कूल तथा बाजार के समय इस सड़क से गुजरना सबसे अधिक जोखिम भरा होता है.

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से दुर्घटना संभावित स्थानों को ब्लैक स्पॉट घोषित कर वहां स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है. साथ ही ओवरस्पीडिंग रोकने के लिए नियमित पुलिस गश्त और सख्त कार्रवाई की भी मांग की है.

ट्रैफिक नियमों के पालन पर दिया जोर

ग्रामीणों ने बताया कि सोनपुर और कोठीपुल के कुछ स्थानों पर लोगों ने हादसे कम होने की कामना से मंदिर बनवाकर पूजा-पाठ भी शुरू किया है. हालांकि उनका कहना है कि केवल आस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है.

लोगों का कहना है कि बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. फिलहाल इस सड़क से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है.


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शंकर कुमार सहनी

लेखक के बारे में

By शंकर कुमार सहनी

शंकर कुमार सहनी 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. लोकल टेलीविजन चैनल से लेकर राष्ट्रीय समाचार पत्रों तक में कार्य कर चुके शंकर राजनीति, अपराध और धर्म-संस्कृति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं.

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