न सिग्नल, न समपार फाटक, दौड़ रहीं ट्रेनें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 Jan 2017 6:33 AM (IST)
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दरभंगा /बेनीपुर : बिरौल-सकरी रेल खंड पर परिचालन के आठ साल बीत गये, पर विभागीय उदासीनता के कारण यह खंड आज भी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है. अन्य सुविधाओं की बात तो दूर सकरी से बिरौल तक दर्जनों खुले समपार फाटक से ट्रेनें दौड़ लगा रही हैं. कई बार हादसा होने के बाद […]
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दरभंगा /बेनीपुर : बिरौल-सकरी रेल खंड पर परिचालन के आठ साल बीत गये, पर विभागीय उदासीनता के कारण यह खंड आज भी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है.
अन्य सुविधाओं की बात तो दूर सकरी से बिरौल तक दर्जनों खुले समपार फाटक से ट्रेनें दौड़ लगा रही हैं. कई बार हादसा होने के बाद भी विभाग यात्रियों के साथ ही आम अवाम की सुरक्षा को तवज्जो नहीं दे रहा. आनन-फानन में हुए उद्घाटन के बाद महकमा ने इस ओर आज तक ध्यान ही नहीं दिया. यही कारण है कि इस क्षेत्र के लोग ट्रेन रहने के बावजूद बस की यात्रा को तरजीह देते हैं.
सिग्नल तक की व्यवस्था नहीं : इतना ही नहीं इस मार्ग के जगदीशपुर, बेनीपुर, बलहा, न्योरी एवं बिरौल रेलवे स्टेशन से बिना सिग्नल के ही ट्रेनों का परिचालन हो रहा है. उल्लेखनीय है कि चार दिसम्बर 2008 को तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद ने दरभंगा जंकशन पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर इस खंड पर ट्रेन परिचालन का उद्घाटन किया था. उस समय तक इस खंड पर पटरी बिछाने के अतिरिक्त कोई काम पूरी तरह से नहीं पाया था. चुनाव की अधिसूचना जारी होने की तिथि निकट रहने के कारण आनन-फानन में उद्घाटन कर दिया गया. कहा गया कि समय के साथ व्यवस्था बहाल की जायेगी, लेकिन इसे यूं ही छोड़ दिया गया.
सिग्नल तक नहीं लगाया गया. वर्षों से बिना सिग्नल व फाटक के हो रहे परिचालन पर प्रतिक्रया जाहिर करते हुए पौड़ी के कमला कान्त झा कहते हैं कि जब से परिचालन शुरू हुआ तब से कई हादसे हो चुके हैं, फिर भी रेल विभाग इसके प्रति कोई संजीदगी नहीं दिखा रहा है. ऐसा लग रहा है कि शायद किसी बड़े हादसे की बाट जोह रहा है. मौजमपुर के राम भरोस महतो कहते हैं कि सुविधा विहीन रेल परिचालन बहाल कर दिये जाने तथा उक्त खण्ड को भगवान भरोसे छोड़ देने से ऐसा लग रहा है
मानो रेल महकमा व स्थानीय जनप्रतिनिधि क्षेत्रवासियों के साथ मजाक कर रहे हैं. वहीं बेनीपुर के डा. जयप्रकाश चौधरी विभागीय उदासीनता के कारण उक्त रेल मार्ग को लोगों के लिए अनुपयोगी बताते हैं. उनका कहना था कि न तो लम्बी दूरी की कोई ट्रेन दी जा रही है औ न ही कोई यात्री सुविधा ही उपलब्ध करायी जा रही है. वहीं संजीव कुमार झा का कहना है कि बदहाली का आलम झेल रहे बेनीपुर बलहा रेलवे स्टेशन पर न तो रोशनी की व्यवस्था है और न ही यात्री शेड का ही प्रबंध किया गया है.
हो चुके कई हादसे : मानव रहित रेल फाटक होने के कारण क्षेत्र में कई बार हादसा हो चुका है. बेलौन एवं धेरूक गुमटी पर कई बार दुर्घटना हुई. बिरौल स्टेशन के समीप भी एक ट्रेक्टर इसकी चपेट में आ चुकी है. बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. वैसे रेलवे की ओर से वर्षों पूर्व बेलौन, बलहा एवं धेरूक गुमटी को मानव सहित करने के लिए कुछ हद तक प्रयास भी किया गया. इसके तहत कर्मियों के लिए भवन निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, पर आज तक अधर में लटका हुआ है. लोग जान जोखिम में डाल कर अवागमन करने को मजबूर हैं.
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