बाजार समिति को अवैध कब्जा के लिये बोली

Updated at :12 Dec 2015 8:14 PM
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बाजार समिति को अवैध कब्जा के लिये बोली

बाजार समिति को अवैध कब्जा के लिये बोली डेढ़ से दो लाख में कराया जा रहा कब्जाफोटो- 1परिचय- बांस का जाफरी बना अवैध कब्जा करने में लगे लोग.सदर. बाजार समिति परिसर में अतिक्रमण कर कब्जा कराने का सिलसिला जारी है. यह रुकने का नाम नहीं ले रहा. इसके लिये बोली भी लगायी जा रही है. […]

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बाजार समिति को अवैध कब्जा के लिये बोली डेढ़ से दो लाख में कराया जा रहा कब्जाफोटो- 1परिचय- बांस का जाफरी बना अवैध कब्जा करने में लगे लोग.सदर. बाजार समिति परिसर में अतिक्रमण कर कब्जा कराने का सिलसिला जारी है. यह रुकने का नाम नहीं ले रहा. इसके लिये बोली भी लगायी जा रही है. कथित रूप से डेढ़ से दो लाख तक में बात पक्की हो जाती है. इससे सरकार को लाखों रुपये राजस्व का हर वर्ष नुकसान हो रहा है. संबंधित विभाग द्वारा इसपर नियंत्रण के लिये कोई पहल नहीं की जा रही है.प्लेटफार्म का अतिक्रमण जारीबाजार समिति परिसर में अवस्थित प्लेटफार्म संख्या 8 का व्यापारियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है. प्लेटफार्म के एक पीलर से दूसरे पीलर के बीच की जगह लेने के लिए बोली लगाये जाने की बात कही जा रही है. यहां तक कि व्यापारियों द्वारा डेढ़ से दो लाख तक में बात बन जाने की बात कही जा रही है. उक्त प्लेटफार्म पर इससे पूर्व पैक्स द्वारा खरीदे गये किसानों के धान रखे जाने के लिए गोदाम के रूप में उपयोग किया जा रहा था. हालांकि सरकारी स्तर से ही प्लेटफार्म के चारों तरफ से सुरक्षा दीवार व गेट का निर्माण कराया जा चुका है. परिसर में आलू-प्याज मंडी की ओर 6 प्लेटफार्म अवस्थित है. जिसमें पांच सरकारी स्तर पर एफसीआइ के हवाले किया जा चुका है. स्टॉफ क्वार्टर व मछली मंडी में होती है अवैध वसूलीपरिसर के भीतर अवस्थित स्टॉफ क्वार्टर एवं मछली मंडी में भी फर्जी तरीके से व्यापारियों को गोदाम के रूप में उपयोग करने के लिये कमरा व दुकान दिया जाता है. इनसे माहवारी किराया वसूला जाता है. जिसका सरकारी स्तर पर कोई लेखा जोखा नहीं रहता है. इससे भी लाखों रुपये राजस्व के रुप में सरकार को नहीं मिल पाता. प्रशासन का अतिक्रमणमुक्त अभियान भी ठंडे बस्ते मेंबाजार प्रांगण के भीतर अतिक्र मण को खाली कराने का अभियान ठंडे बस्ते में पड़ा नजर आ रहा है. पिछले दिनों प्रशासन ने कई शिकायत के पश्चात भीतर से बाहर तक के अवैध कब्जे को खाली कराने की योजना बनाकर खाली कराने का अभियान तो शुरू करया गया, लेकिन बाहर तक ही सीमित रह गयी. उस वक्त प्रशासन ने भीतर से भी अवैध कब्जा हटाने का आश्वासन दिया था. अतिक्रमणमुक्त होना तो दूर ऊपर से आये दिन अवैध कब्जे का सिलसिला जारी है. अगर यही स्थिति बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब कुछ ही दिनों में पूरे परिसर में दबंगों का बोलबाला हो जायेगा और वह सिर्फ पैसों का चरागाह ही साबित होगा. वर्त्तमान में परिसर प्रभारी शंभुशरण श्रीवास्तव का कहना है कि मना करने पर भी अतिक्रमणकारी मानते नहीं है. कहते हैं अधिकारी सदर एसडीआो गजेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

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