सभी पदों पर जमाया कब्जा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Mar 2018 4:56 AM (IST)
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दरभंगा में मक्के की बाली में दाना नहीं देख किसान को ब्रेन हेमरेज, गंभीर कुशेश्वरस्थान(दरभंगा) : बड़ी उम्मीद से मक्के की खेती की थी. लहलहाती फसल को देख सपने बुनने लगे थे. पौधे में मक्के की बाली भी अच्छा नजर आ था. खुशी-खुशी जब एक बाली को छीलकर देखा तो उसमें एक भी दाना नहीं […]
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दरभंगा में मक्के की बाली में दाना नहीं देख किसान को ब्रेन हेमरेज, गंभीर
कुशेश्वरस्थान(दरभंगा) : बड़ी उम्मीद से मक्के की खेती की थी. लहलहाती फसल को देख सपने बुनने लगे थे. पौधे में मक्के की बाली भी अच्छा नजर आ था. खुशी-खुशी जब एक बाली को छीलकर देखा तो उसमें एक भी दाना नहीं था. एक के बाद एक कई बालियों को देखा, किसी भी बाली में दाना नहीं था. एक झटके में उसके सपने का महल धराशायी हो गया. यह सदमा किसान सहन नहीं कर सका.
वहीं बेहोश होकर गिर गया. सदमा इतना गहरा लगा कि जीवन व मौत से आज वृद्ध किसान झूल रहा है. मामला सुल्तानपुर का है. सुलतानपुर गांव के किसान शिवदानी यादव (62) ने दो एकड़ में मक्के की खेती की थी. फसल देखने के लिए गत सात मार्च की दोपहर अपने खेत में गया. मक्के बाली छीलकर देखा, तो किसी बाली में दाना नहीं मिला. यह देख बेहोश हो कर खेत मं ही गिर गया. ग्रामीणों के सहयोग से
दरभंगा में मक्के…
परिजन उठाकर इलाज कराने चिकित्सक के पास पहुंचे. चिकित्सक ने गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज के लिए दरभंगा ले जाने की सलाह दी. इस पर परिजन चार पहिया गाड़ी भाड़े पर लेकर दरभंगा ले गये. वहां डॉ दिलीप साह के क्लिनिक में भर्त्ती कराया. परिजनों के अनुसार वहां चिकित्सक ने जांच में ब्रेन हेमरेज होने की बात बतायी. साथ ही उनके बचने की संभावना कम होने की बात चिकित्सक ने बतायी. इसके बाद परिजन घर वापस लेकर चले आये. घर में ही जीवन व मौत के बीच झूल रहा है.
उल्लेखनीय है कि यह बाढ़ ग्रस्त इलाका है. अधिकांश समय खेत पानी में डूबी रहती है. ऐसे में मक्के की खेती ही एक मात्र सहारा है. इस बार किसान खेतों में लगी अच्छी फसल देख गद्गद हो रहे थे. दस वर्षों बाद इतनी अच्छी फसल नजर आ रही थी. मक्के की बड़ी-बड़ी बाली सपने को पंख लगा रहे थे. अधिकांश पेड़ में दो-दो बाली निकली देख किसान के मन का मयूर नाच रहा था, परन्तु बाली में दाना नहीं निकलने से किसानों के सारे अरमान एक झटके में चकनाचूर हो गये. ब्याज पर पैसे लेकर खेती करने के बाद अब वापस पैसे लौटाने की चिंता सताने लगी है. किसान शिवदानी यादव की पुत्रवधू आरती देवी ने मक्का की बाली दिखाते हुए बताया कि एक एकड़ की खेत में 15 से 20 हजार खर्च आते है. कर्ज लेकर खेती की थी. दाना नहीं देख कर्ज चुकाने की चिंता ने मेरे ससुर का यह हाल कर दिया है.
दो एकड़ में की थी खेती, एक पौधे में दो-दो बाली देख थे गदगद
कर्ज लेकर की खेती, जान पर बन आयी वापस करने की चिंता
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