दिल्ली के मैथिली नाट्य महोत्सव में उठा दरभंगा एम्स का मुद्दा, बिहार से पलायन पर चर्चा

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :31 Mar 2023 3:40 PM (IST)
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दिल्ली के मैथिली नाट्य महोत्सव में उठा दरभंगा एम्स का मुद्दा, बिहार से पलायन पर चर्चा

दिल्ली आम आदमी पार्टी के विधायक और मैथिली-भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष संजीव झा ने कहा कि दिल्ली में मैथिली और भोजपुरी के संवर्धन और विकास के लिए दिल्ली सरकार हर स्तर पर सहयोग देने को तैयार है. उन्होंने कहा कि बिहार-मिथिलांचल के विकास के लिए वहां पर उद्योग का आना जरूरी है.

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दिल्ली ब्यूरो : बिहार के मिथिलांचल में निर्माणाधीन एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में हो रही देर को लेकर न केवल राज्य के निवासियों बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली में रहने वाले बिहार के साहित्यकारों समेत अन्य प्रवासियों के मन में सवाल पैदा हो रहे हैं. गुरुवार को दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली सरकार के सहयोग से मैथिल पत्रकार ग्रुप की ओर से आईजीएनसी सभागार दिल्ली में 27-29 मार्च को आयोजित तीन दिवसीय मैथिली नाट्य साहित्य महोत्सव में आए नेताओं ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ और दरभंगा में बनने वाले दूसरे एम्स में देरी को लेकर चिंता जाहिर की.

केंद्र और बिहार को मिलकर करना होगा काम

इस महोत्सव में आए नेताओं का कहना था कि केंद्र और बिहार सरकार को इस पर मिलकर कार्य करना होगा. बाढ़ रोकने के लिए नेपाल-भारत सरकार के साथ ही बिहार सरकार की सहभागिता वाली एक त्रिपक्षीय समिति बनानी होगी. इस तरह की एक समिति दशकों से कागजों में नेपाल में चल रही है, लेकिन जमीन पर उसका कोई कार्य नहीं हो रहा है. इस कार्यक्रम में दिल्ली के विधायक ऋतुराज झा, संजीव झा, दरभंगा के सांसद गोपाल ठाकुर, बिहार सरकार में जल संसाधन मंत्री संजय झा, मैथिली भोजपुरी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष नीरज पाठक, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के निदेशक रमेश चंद्र गौड़, कांग्रेस के सचिव प्रणव झा, भाजपा किसान मोर्चा के मनोज यादव और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयूख ने बिहार-मिथिलांचल के विकास और वर्तमान हालात पर उपस्थित लोगों को संबोधित किया.

दो नाटकों का मंचन

इस अवसर पर रोशन कुमार झा की ओर से लिखित दो नाटकों ‘बौकी’ और ‘बिजहो’ का मंचन भी किया गया, जिसमें बिहार की कुरीतियों पर व्यंग्य के माध्यम से लोगों को इन पुरानी कुप्रथाओं के अब भी प्रचलन में होने को लेकर चर्चा करने पर मजबूर किया. बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी और भारत सरकार में संयुक्त सचिव डा एन विजय लक्ष्मी ने इस अवसर पर गणेश वंदना पर मनमोहक भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया.

एनबीटी के संपादक की शॉर्ट फिल्म का प्रीमियर

इस अवसर पर बिहार-मिथिलांचल के विकास को लेकर एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया. इसमें प्रियंरजन, प्रभाष झा, ऋतेश पाठक, सुजीत ठाकुर, ईश्वर नाथ, राकेश कुमार, मनोज मिश्र जैसे वरिष्ठ पत्रकारों ने अपने-अपने विचार पेश किए. इसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार डॉ रहमतुल्ला ने किया. इन वक्ताओं का कहना था कि बिहार-मिथिलांचल के विकास के लिए रोजगार और उत्पाादन इकाईयों को राज्य में बढ़ाना होगा. गृह और कुटीर उद्योग की रफ्तार भी बढ़ानी होगी. विकसित प्रदेशों की तरह सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से इंडस्ट्री को आकर्षित करना होगा. इस अवसर पर नवभारत टाइम्स के संपादक सुधीर मिश्र की शॉर्ट फिल्म ‘गूलर का फूल’ का विशेष प्रीमियर भी किया गया.

बिहार की बाढ़ पर नेपाल-बिहार के प्राधिकरण की जरूरत

इस मौके पर बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा कि केंद्र सरकार को बिहार-नेपाल सरकार को साथ लेकर हर साल आने वाली बाढ़ पर प्रभावी रोक के लिए एक प्राधिकरण बनाने की जरूरत है. इसका निश्चित कार्यकाल हो। यहां की नदियों में बड़े बांध बनाने चाहिए, ताकि बाढ़ की विभीषिका न हो. उन्होंने कहा कि नेपाल अलग देश है. ऐसे में केंद्र सरकार का आगे आना जरूरी है. उन्होंने कहा कि वह जल संसाधन मंत्री हैं और अचंभित हैं कि एक कागजी समिति इस मुद्दे पर बरसों से काम कर रही है. उसका नेपाल में कार्यलय भी है. भारत के अधिकारी भी वहां पर कथित रूप से तैनात हैं, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अगर बिहार में बाढ़ रोकने में मदद करती है, तो वहां पर काफी रोजगार हो सकते हैं. इससे पलायन भी रुकेगा.

मखाना उद्योग पर चिंता

दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि दरंभगा में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान संस्थान बनाया था, लेकिन उनके बाद की सरकार ने उसका राष्ट्रीय स्तर घटा दिया. इससे मखाना उद्योग को नुकसान हुआ. वह इसे फिर से राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने दरंभगा एयरपोर्ट को मिथिलांचल और बिहार के विकास का प्रतीक करार देते हुए कहा कि इसके विस्तार की जरूरत है. इसके लिए वह कार्य कर रहे हैं.

मिथिलांचल के लिए वंदे भारत की जरूरत

उन्होंने मिथिलांचल को कई ट्रेन देने के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद करते हुए यहां के लिए एक राजधानी ट्रेन और वंदे भारत की भी मांग की. उन्होंने कहा कि निर्मली-सहरसा को जोड़ने के लिए बने पुल का नाम अटल सेतु रखा जाए. उन्होंने बिहार के दरभंगा में बनने वाले दूसरे एम्स के लिए बिहार सरकार की ओर से भूमि देने में की जा रही देरी को लेकर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस पर तुरंत कदम उठाना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि बिहार सरकार की इस देरी की वजह से यह एम्स किसी दूसरे राज्य में चला जाए. हालांकि, यह एम्स आठ करोड़ आबादी के साथ ही सिक्किम और नेपाल तक के लोगों के लिए वरदान साबित होने वाला है. इससे दिल्ली एम्स पर भी दबाव लगभग आधा हो जाएगा.

संजय मयूख ने भाषाओं पर डाला प्रकाश

भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख ने कहा कि बिहार में कई भाषा है. सभी का अपना महत्व और इतिहास है. मैथिली को सबसे मीठी बोली में शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि जब कविराज विद्यापति की माता भगवती को लेकर की गई वंदना जय-जय भैरवी गाई जाती है. वह सीधे आपके दिल और दिमाग मे उतरती है. यह वंदना अद्भुद है. उन्होंने कहा कि मैथिल पत्रकार ग्रुप जिस तरह से अपनी भाषा, संस्कृति, रिति-रिवाज को बचाने के लिए तत्पर है. पत्रकारिता जैसे विषम और व्यवस्तता जैसी विधा में शामिल होने के बाद भी जिस तरह से इसके सदस्य यह कार्य कर रहे हैं, वह अप्रतिम है. उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद बिहार में विकास के जितने कार्य किये गए हैं, वह पहले नहीं हुए हैं. गंगा पर दूसरे पुल से लेकर नई रेल लाइन और अन्य सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बिहार में बढ़ा है. उन्होंने कहा कि वह एक एमएलसी के रूप में बिहार और मिथिलांचल के हर व्यक्ति के लिए कार्य करने को संकल्पित हैं.

मैथिली-भोजपुरी के विकास के लिए दिल्ली सरकार कटिबद्ध

दिल्ली आम आदमी पार्टी के विधायक और मैथिली-भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष संजीव झा ने कहा कि दिल्ली में मैथिली और भोजपुरी के संवर्धन और विकास के लिए दिल्ली सरकार हर स्तर पर सहयोग देने को तैयार है. उन्होंने कहा कि बिहार-मिथिलांचल के विकास के लिए वहां पर उद्योग का आना जरूरी है. इसके लिए बिहार और केंद्र सरकार मिलकर कार्य करे. इसमें दिल्ली सरकार भी अपनी भूमिका निभाने को तैयार है.

सांस्कृतिक तौर पर समृद्ध है बिहार

विधायक ऋतुराज झा और नीरज पाठक ने कहा कि हम सांस्कृतिक रूप से सजग प्रदेश बिहार से आते हैं. यहां के हर शिक्षित व्यक्ति का कर्तव्य है कि यह सोचे कि हम बिहार के विकास में क्या भूमिका अदा कर सकते हैं‍. कांग्रेस सचिव प्रणव झा ने मैथिल पत्रकार ग्रुप की सराहना करते हुए कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति-लोक-कला और परंपरा को बचाने के लिए किया जा रहा उनका प्रयास सराहनीय है. इसकी वजह यह है कि जब भाषा बचेगी, तभी उसी समय संस्कृति बचेगी. यह हमारे इतिहास को भी बचाने का कार्य करती है. पत्रकार जनमत बनाते हैं. ऐसे में उनकी ओर से यह पहल अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह जनता तक अपनी बात तेजी और मजबूती से पहुंचाते हैं.

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आईएएस अफसर डॉ विजय लक्ष्मी की मनमोहक अदाकारी

इस कार्यक्रम के दौरान वर्ष 1995 बैच की बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी और भारत सरकार में संयुक्त सचिव के रूप में तैनात डॉक्टर एन विजयलक्ष्मी ने इस दौरान गणेश वंदना पर भरतनाट्यम प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया. इसके अलावा, मैलोरंग (मैथिली लोक रंग) नाटय समूह के साथ मर्यादा, जय-जोहार, अष्टादल कला अकादमी आदि ने प्रस्तुति दी. इसके कलाकारों ने अपने नाटकों, गजल, गीत-संगीत से दर्शकों को तीन दिन तक बांधे रखा. इस कार्यक्रम का निर्देशन प्रकाश झा ने किया, जबकि कार्यक्रम में उनकी सहायता बृजेंद्र नाथ, संजीव सिन्हा, विद्यानाथ झा, रोशन कुमार, दीपक कुमार झा, भवेश नंदन, अजय पासवान, राखी कुमारी, प्रतिभा ज्योति, मदन झा, प्रमोद कुमार झा और गुड्डू ने किया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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