Bihar News: निगरानी को मिल रहे मुखियाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें, अधिकांश इस बार हार चुके चुनाव
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 18 Dec 2021 8:04 AM
Bihar News मुखिया समेत अन्य जनप्रतिनिधियों की तुलना में कर्मी और अधिकारियों के खिलाफ ज्यादा संख्या में शिकायतें आती हैं. पहले निगरानी में महीने में औसतन छह-सात शिकायतें ही आती थी, लेकिन इस बार इनकी संख्या बढ़कर करीब डेढ़ दर्जन हो गयी है.
पटना. निगरानी ब्यूरो के पास अब तक पूरे राज्य से करीब दो दर्जन मुखिया के खिलाफ आम लोगों की तरफ से शिकायतें आ चुकी हैं. इन मुखियाओं के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले ही सभी शिकायतें आयी हैं. कुछ शिकायतें चुनिंदा योजनाओं खासकर नल-जल योजना, गली-नाली योजना, पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें ज्यादा आयी हैं. जिन मुखियाओं के खिलाफ शिकायतें आयी हैं, उसमें अधिकांश इस बार चुनाव हार चुके हैं.
कई मामलों में शिकायत करने वाले ही बाद में मुकर जाते हैं. निगरानी ब्यूरो के स्तर से भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति एवं ट्रैप के जरिये लगातार कार्रवाई होने की वजह से शिकायतें आने का सिलसिला काफी बढ़ गया है. मुखिया समेत अन्य जनप्रतिनिधियों की तुलना में कर्मी और अधिकारियों के खिलाफ ज्यादा संख्या में शिकायतें आती हैं. पहले निगरानी में महीने में औसतन छह-सात शिकायतें ही आती थी, लेकिन इस बार इनकी संख्या बढ़कर करीब डेढ़ दर्जन हो गयी है.
कुछ शिकायतें मुखिया के चुनाव हारने के बाद निगरानी को प्राप्त हुई हैं. फिलहाल इन सभी शिकायतों की जांच चल रही है. इसके बाद इन सभी पर उचित कार्रवाई की जायेगी. निगरानी ब्यूरो को मुखिया के अलावा पंचायत स्तरीय अन्य जनप्रतिनिधियों के बारे में भी शिकायतें आयी हैं, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है. सबसे ज्यादा शिकायतें मुखिया के खिलाफ ही प्राप्त हुई हैं. पिछले चार-पांच वर्षों में निगरानी ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के मामले में दो-तीन मुखिया के खिलाफ ही कार्रवाई कर पाया है. इसकी मुख्य वजह इनके खिलाफ सटीक साक्ष्यों और गवाहों की कमी का होना है.
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परंतु अभी भी सबसे ज्यादा शिकायतें प्रखंड और जिला स्तरीय पदाधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ ही आती हैं. इनमें आधी शिकायतें गलत होती हैं, लेकिन जो शिकायतें सही होती हैं, उनमें अधिकांश के खिलाफ संज्ञान लेकर कार्रवाई भी की गयी है. कई शिकायतों की अभी जांच चल रही है. कई शिकायतों में तथ्य या समुचित साक्ष्य का अभाव होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती है.
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