रामविलास के 'बंगले' से चिराग और पारस बेदखल, चुनाव आयोग ने लोजपा के नाम और निशान के उपयोग पर लगाया प्रतिबंध

चुनाव आय़ोग ने लोजपा का चुनाव चिन्ह बंगला को फ्रीज कर दिया है. चाचा पशुपति कुमार पारस और भतीजा चिराग पासवान दोनों में से किसी को रामविलास पासवान का बंगला नहीं सौंपा गया. चाचा-भतीजा दोनों के लिए यह एक बड़ा झटका है.
पटना. चुनाव आय़ोग ने लोजपा का चुनाव चिन्ह बंगला को फ्रीज कर दिया है. चाचा पशुपति कुमार पारस और भतीजा चिराग पासवान दोनों में से किसी को रामविलास पासवान का बंगला नहीं सौंपा गया. चाचा-भतीजा दोनों के लिए यह एक बड़ा झटका है.
अब चिराग या पारस कोई भी इस चुनाव चिन्ह का उपयोग नहीं कर पायेंगे. दोनों में से कोई भी गुट लोक जनशक्ति पार्टी के नाम का भी उपयोग नहीं कर पायेंगे. चुनाव आयोग ने शनिवार को यह आदेश जारी किया है.
लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के निधन के बाद से ही लोजपा के अंदर एक राजनीतिक खींचतान देखी जा रही थी. चुनाव के बाद चाचा पशुपति और भाई प्रिंस ने पार्टी पर अपना दावा पेश कर दिया. लोकसभा में पारस गुट को मान्यता भी मिल गयी और अपनी ही पार्टी में पारस अलग थलग हो गये.
पारस को मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री का पद मिला. ऐसे में चिराग के लिए बस एक ही उम्मीद बची थी कि पार्टी का निशान उनके पास रह जाये. इसके लिए दोनों गुट चुनाव आयोग से गुहार कर रहे थे. लोजपा का असली अध्यक्ष कौन है, इसको लेकर चुनाव आयोग में सुनवाई चल रही थी.
चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस दोनों ने चुनाव आयोग के समक्ष अपने अपने दावे रखे. दोनों का दावा रहा कि पार्टी के असली अध्यक्ष वही हैं और उनके नेतृत्व वाले गुट को ही लोजपा की मान्यता मिलनी चाहिये. आयोग ने दोनों के दावों की पड़ताल की थी.
इस विवाद के बीच ही बिहार में उपचुनाव की घोषणा हो गयी और दोनों गुट अपने अपने उम्मीदवार को लेकर आयोग के दरबाजे पर पहुंच गये. चुनाव आयोग के समक्ष लोजपा के दोनों गुटों ने ये दावा किया था कि इस चुनाव में उसे लोजपा के नाम और चुनाव चिन्ह के उपयोग की मंजूरी दी जाये.
चुनाव आय़ोग से ये भी आग्रह किया गया था कि वह 8 अक्टूबर से पहले फैसला ले ले ताकि उनके उम्मीदवार पार्टी और चुनाव चिन्ह का उपयोग कर पायें. ऐसे में आयोग ने शनिवार को एक अंतरिम फैसला दिया है. इस फैसले के बाद बिहार की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में दोनों गुटों को पार्टी के नाम और निशान के उपयोग से रोक दिया गया है. उपचुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 8 अक्टूबर है.
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कोई अब लोक जनशक्ति पार्टी के नाम का उपयोग नहीं कर पायेगा.
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कोई अब चुनाव चिन्ह बंगला का उपयोग नहीं कर पायेगा
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लोक जनशक्ति पार्टी से लिंक कर अपने गुट का नाम रख सकते हैं. जैसे लोजपा (चिराग) या लोजपा (पारस)
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दोनों अपने लिए नया चुनाव चिन्ह खोज सकते हैं.
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तारापुर या कुशेश्वरस्थान में दोनों को नये चुनाव चिन्ह का उपयोग करना होगा.
Posted by Ashish Jha
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