ePaper

बोधगया में अब मंदिर के बाहर विदेशियों के आगे हाथ नहीं फैलायेंगे बच्चे, भाषा सीख बनेंगे आत्मनिर्भर

Updated at : 23 Oct 2022 7:28 AM (IST)
विज्ञापन
बोधगया में अब मंदिर के बाहर विदेशियों के आगे हाथ नहीं फैलायेंगे बच्चे, भाषा सीख बनेंगे आत्मनिर्भर

बोधगया के बकरौर गांव में पूर्व से बने चरवाहा विद्यालय परिसर में आसपास के वैसे बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है, जो बोधगया में विभिन्न मंदिरों के बाहर यहां आने वाले देशी-विदेशी श्रद्धालु व सैलानियों के आगे हाथ फैलाया करते थे.

विज्ञापन

बोधगया (गया). बोधगया में मंदिर के बाहर विदेशियों के आगे अब हाथ फैलाते बच्चे नहीं नजर आयेंगे. इन बच्चे को भाषा सीखा कर आत्मनिर्भर बनाने की पहल की गयी है. बोधगया के बकरौर गांव में पूर्व से बने चरवाहा विद्यालय परिसर में आसपास के वैसे बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है, जो बोधगया में विभिन्न मंदिरों के बाहर यहां आने वाले देशी-विदेशी श्रद्धालु व सैलानियों के आगे हाथ फैलाया करते थे.

ज्यादातर बच्चे महादलित टोले के

इनमें ज्यादातर बच्चे महादलित टोले के हैं. कुछ बच्चे गाय, भैंस व बकरी चराने में भी अपना बचपन खपा रहे थे. कई तो खेतों में काम करने में जुटे थे तो कई अपने माता-पिता के साथ ईंट भट्ठों पर रहा करते थे. लेकिन, अब इनके जीवन में नया मोड़ आया है और फिलहाल 170 बच्चे सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक स्कूल आते हैं और हिंदी, अंग्रेजी , गणित के साथ ही तिब्बती भाषा की पढ़ाई करने में मन लगा रहे हैं.

निशुल्क पढ़ाई के साथ ही बच्चों को पाठ्य सामग्री भी दे रहा

स्कूल चला रहे शिक्षक रामजी मांझी ने इस बारे में बताया कि वह 1980 में तिब्बती लोगों के साथ 25 रुपये प्रति माह की नौकरी करने बोधगया से चला गया था. उनके साथ रह कर तिब्बती भाषा सीखा और एक तिब्बती से शादी भी कर ली. अब यहां आकर बच्चों की स्थिति देखा तो इनके जीवन स्तर बदलने की ठानी है. निशुल्क पढ़ाई के साथ ही बच्चों को पाठ्य सामग्री भी मुहैया करायी जाती है.

स्कूल आनेवाले बच्चे ज्यादातर गरीब घर के

यह सब बच्चों को एक शर्त पर मुहैया करायी जा रही है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे अब मंदिरों के आगे हाथ नहीं फैलायेंगे और तिब्बती, अंग्रेजी आदि भाषा सिख कर स्वावलंबी बनेंगे. स्कूल आनेवाले बच्चे ज्यादातर गरीब घर के हैं. वे स्कूल नहीं जाते थे. वे मंदिरों के आगे खड़े होकर विदेश के आनेवाले पर्यटकों से मांग कर अपना काम चलाते थे. यह रामजी को अच्छी नहीं लगी. उन्होंने इनको पढ़ाने का बीड़ा उठाया है. इसकी लोग प्रशंसा कर रहे हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन