हठधर्मिता से विकास ठप

बेतिया : जिला परिषद अध्यक्ष शैलेंद्र गढ़वाल ने डीडीसी पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए कई अन्य आरोप लगाये हैं. कहा है कि डीडीसी के इस रवैये से जिले का विकास ठप हो गया है. जिला परिषद बोर्ड की ओर से जारी प्रस्ताव का डीडीसी कोई संज्ञान नहीं लेते हैं. कार्यालय भी वह कभी-कभार ही […]
बेतिया : जिला परिषद अध्यक्ष शैलेंद्र गढ़वाल ने डीडीसी पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए कई अन्य आरोप लगाये हैं. कहा है कि डीडीसी के इस रवैये से जिले का विकास ठप हो गया है. जिला परिषद बोर्ड की ओर से जारी प्रस्ताव का डीडीसी कोई संज्ञान नहीं लेते हैं. कार्यालय भी वह कभी-कभार ही आते हैं. इसका असर है कि पिछले वित्तीय वर्ष का ही 3.65 करोड़ रुपये डंप पड़ा है. विकास कार्यों से संबंधित प्रस्ताव लंबित हैं, लेकिन डीडीसी को फुर्सत नहीं है कि वह इसपर विचार करें. इससे पैसा खर्च नहीं हो पा रहा है.
श्री गढ़वाल मंगलवार को अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में यह आरोप लगा रहे थे. उन्होंने इस दौरान राज्य सरकार पर पंचायती राज व्यवस्था खत्म करने के प्रयास का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष मनाकर गांधी जी के विचारों को आत्मसात करने के लिए सरकारें प्रेरित कर रही है.
दूसरी ओर से गांधी जी की ओर से लागू की गयी पंचायत राज व्यवस्था को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है. जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की उपेक्षा की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से करीब 20 करोड़ का बजट मिला है. लेकिन, अब इसमें यह पेंच लगा दिया गया है कि दो निश्चय योजना नाली-गली व नल-जल योजना में इन पैसों को वार्ड विकास समिति खर्च करेगी. यह जिला परिषद बोर्ड के अधिकारों की कटौती है. हमे इसपर आपत्ति नहीं है, यह पैसा निश्चय योजना में खर्च हो रही है. आपत्ति इस बात पर है, जब बजट जिला परिषद का है तो कार्यदायी संस्था भी जिला परिषद को ही बनाया जाय. लेकिन, सरकार वार्ड विकास समिति की ओर से यह पैसा खर्च करने की बात कह रही है.
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो सांसद, विधायक की निधि को वार्ड विकास समिति से क्यों दूर रखा गया है. जिप अध्यक्ष ने कहा कि सभी 29 विभागों के जिलास्तरीय पदाधिकारी, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, पंचायत स्तर कर्मी को क्रमश: जिला परिषद, पंचायत समिति व ग्राम पंचायत के अंतर्गत कार्य करना है तथा मुख्यालय छोड़ने से पहले उक्त संस्था से अनुमति लेना है. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. अधिकारी मनमानी ढंग से कार्य कर रहे हैं. जिला परिषद अध्यक्ष, प्रखंड प्रमुख व मुखिया का मुख्य कार्य केवल सामान्य बैठकों के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर तक सीमित हो गया है. बैठकों के प्रस्ताव पर कोई अनुपालन नहीं होता है. इस मौके पर विजय शर्मा, नीतू देवी, जवाहिर साह, खुशबू राज, लालमुनी देवी, सलोनी खातून, अजय कुशवाहा समेत अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. वहीं इस संदर्भ में डीडीसी राजेश मीणा का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है. जहां तक उनपर आरोप लगने की बात है, यदि आरोप आएगा तो वह इसे देखेंगे.
11 मई को धरना, 16 अगस्त को सामूहिक इस्तीफा : जिला परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में कटौती, 29 विभागों के कार्यों को पंचायती व्यवस्था से अलग रखने, 14 वित्त से अलग रखने, जिला योजना समिति के चुनाव में विलंब समेत अन्य मुद्दों को लेकर राज्य के 38 जिलों के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पटना में धरना देंगे. इसके बाद द्वितीय चरण में 25 से 30 मई जिलाधिकारी को ज्ञापन, तृतीय चरण में 30 जून को पंचायत प्रतिनिधि महाकुंभ व राजभवन मार्च व अंतिम चरण में 16 अगस्त को जिला मुख्यालय स्तर पर सभी पंचायत प्रतिनिधिगण का सामूहिक इस्तीफा कार्यक्रम होगा.
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