सरहद की हिफाजत करेंगी चंपारण की दो बेटियां

Published at :05 Feb 2017 4:43 AM (IST)
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सरहद की हिफाजत करेंगी चंपारण की दो बेटियां

जज्बे को सलाम चंपारण की बेटियों ने फिर साबित कर दिखाया कि वह बेटों से कम नहीं है. चाहे वह देश की सुरक्षा का मामला ही क्यों न हो. बैरिया के बगही बघंबरपुर गांव की बेटी नीतू व राजवंती ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. इन दोनों बेटियों का चयन सेना में हुआ है. […]

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जज्बे को

सलाम
चंपारण की बेटियों ने फिर साबित कर दिखाया कि वह बेटों से कम नहीं है. चाहे वह देश की सुरक्षा का मामला ही क्यों न हो. बैरिया के बगही बघंबरपुर गांव की बेटी नीतू व राजवंती ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. इन दोनों बेटियों का चयन सेना में हुआ है. गांव की मिट्टी में पली-बढ़ी बेटियां अब देश की सरहद की हिफाजत करेंगी.
श्रीनगर (बेतिया) : दृढ़ इच्छाशक्ति व जुनून से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है. बैरिया के बगही बघंबरपुर गांव में किसानी करनेवाले चंद्रिका कुशवाहा की बेटी नीतू व टेंपोचालक शंभु चौधरी की लाड़ली राजवंती ने आधी आबादी व जिले का मान बढ़ाया है. इनका चयन भारतीय सेना के विंग अर्धसैनिक बल में हुआ है. इसको लेकर पूरे गांव में उत्सव का माहौल है. तमाम झंझावातों को झेलते हुए सेना में शामिल
सरहद की हिफाजत
हुई नीतू व राजवंती के हौसले को आज हर कोई सलाम कर रहा है. भले ही नीतू और राजवंती आज सेना में चयनित हो चुकी हैं, लेकिन गांव के परिवेश से निकल कर यहां तक पहुंचना इनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था.
बैरिया के बगही बघंबरपुर की नीतू व राजवंती का अर्धसैनिक बल में हुआ चयन
हौसले से पायी सफलता
रोज सुबह विद्यालय प्रांगण में दौड़ लगा रही इन बेटियों के हौसले बढ़ानेवाले तो कम थे, लेकिन ताने मारनेवालों की संख्या कई गुना थी. पर, नीतू और राजवंती ने इसकी परवाह नहीं की. इनके आगे बढ़ने में अड़चन परिवार की आर्थिक स्थिति भी थी. लेकिन, अपनी जरूरतों में कटौती कर इन बेटियों ने अपनी पढ़ाई पूरी की और आज सेना में चयनित होकर पूरे जिले का गौरवान्वित महसूस करा दिया. नीतू बताती हैं कि उनके पिता चंद्रिका कुशवाहा छोटे किसान हैं. घर की आर्थिक स्थिति
हौसले से पायी
ठीक नहीं होने के बाद भी उनके पिता ने पढ़ाई से कभी नहीं रोका और न ही पैसे की कमी आने दी. वह कहती है कि उनके पापा की इच्छा थी कि वह सेना में जाकर देश की सेवा करें. आज पिता की प्रेरणा, सहयोग और आगे बढ़ने के लिए उनके दिये गये हौसले से वह इस मुकाम पर पहुंची है. वह अपनी मां ललिता देवी को भी अच्छी सहयोगी मानती हैं.
पापा के साथ रोज सुबह दौड़ती थी राजवंती
अर्धसैनिक बल में चयनित राजवंती कुमारी ने बताया कि उनके पिता शंभु चौधरी टेंपो चला कर परिवार की आजीविका चलाते हैं. उसने पिता से इच्छा जाहिर की थी कि वह पुलिस में जाना चाहती है. पिता शंभु ने इसमें उनका पूरा सहयोग किया. सुबह वह दौड़ने भी जाती थी, तो साथ में उनके पिता भी जाते थे. बेटी-पापा की जोड़ी साथ में दौड़ती थी. मां प्रेमलता देवी ने भी उनका हौसला बढ़ाया. नीतू व राजवंती की शिक्षिका सुनीता कुमारी श्रीवास्तव बताती हैं कि दोनों छात्राएं खेलकूद में काफी आगे थी. प्रखंड व जिला स्तर की कई प्रतियोगिताओं ने इन्होंने स्थान प्राप्त किया.
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