एक आना भी नहीं खर्च किये विधायक जी

Published at :16 Nov 2016 2:53 AM (IST)
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एक आना भी नहीं खर्च किये विधायक जी

जिले से चुन कर राजधानी का सफर करनेवाले माननीयों के कार्यकाल का एक साल बीत चुका है. इस वर्ष विधायक जी अपने निधि का एक आना भी खर्च नहीं किये हैं. सिर्फ आश्वासनों से ही काम चलाया गया है़ रिपोर्ट कार्ड जिले के नौ में से महज चार विधायकों की ओर से की गयी अनुशंसा […]

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जिले से चुन कर राजधानी का सफर करनेवाले माननीयों के कार्यकाल का एक साल बीत चुका है. इस वर्ष विधायक जी अपने निधि का एक आना भी खर्च नहीं किये हैं. सिर्फ आश्वासनों से ही काम चलाया गया है़

रिपोर्ट कार्ड
जिले के नौ में से महज चार विधायकों की ओर से की गयी अनुशंसा को मिली है प्रशासनिक स्वीकृति, पर काम शुरू नहीं
22.40 करोड़ रुपये जिले के हैं माननीयों की निधि में
3.57 करोड़ की ही योजनाओं को ही मिली है स्वीकृति
274 योजनाओं की माननीयों की ओर से की गयी है अनुशंसा
बेतिया : सरकारी नियमों की पेंच कहे या फिर माननीयों की व्यस्तता कि साल भार बाद भी विधायक जी अपनी निधि का एक आना भी विकास के कार्यों पर खर्च नहीं कर सके है. माननीयों के निधि की पूरी की पूरी राशि बची हुई है. जबकि नेताजी के विधायक बनने का एक साल पूरा हो चुका है. बावजूद इसके अपने इलाके में विकास कार्यों पर अपनी निधि के पैसे खर्च करने में जिले के सभी माननीय पीछे हैं. पूरा साल कागजी कोरम और आश्वासनों में ही बीत गया है.
जिला प्रशासन के आंकड़े तस्दीक करते हैं कि जिले के नौ में से महज चार विधायकों की ओर से की गई अनुशंसाओं को ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल सकी है, लेकिन कार्य कहीं नहीं शुरू हो सका है़ जबकि सभी विधायकों को हर वित्तीय वर्ष में मिलने वाली उनकी निधि के इस वित्तीय वर्ष के दो करोड़ रुपये आ चुके हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, जिले के नौ विधायकों व तीन पार्षदों की निधि मिलाकर कुल 22 करोड़ 40 लाख रुपये हैं, लेकिन इसमें से महज तीन करोड़ 57 लाख रुपये के ही योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति मिल सकी है, जो पूरे राशि का सिर्फ 15 फीसदी है. अभी भी 18 करोड़ 82 लाख रुपये डंप पड़े हैं. वह भी तब, जब इलाके में समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है.
नियमावली की पेच भी देरी की वजह
विधायक निधि खर्च नहीं होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह सरकारी नियमावली बनकर उभरी है़ इस नये नियमावली में कई विकास कार्यों को विधायक निधि के जरिए कराने से मनाही कर दी गई है. लिहाजा माननीय अपने पैसे खर्च कहा करें, इसको लेकर माथापच्ची करने में ही समय बीत जा रहा है़ जबकि, पहले विधायक अपनी निधि के पैसों से कोई भी विकास कार्य करा लेते थे.
भागीरथी को छोड़ अन्य के प्रस्तावों की स्वीकृत नहीं
यूं तो विधान पार्षद लालबाबू को छोड़ सभी माननीयों की ओर से प्रस्तावों की अनुशंसा कर दी गई है. लेकिन, इसमें से अक्तूबर माह तक चार विधायक व दो विधान पार्षद की ही अनुशंसा में कुछ योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है. भाजपा के चनपटिया विधायक प्रकाश राय, नौतन विधायक नारायण प्रसाद, बगहा विधायक राघव शरण पांडेय के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली है. आंकड़ों के मुताबिक, 274 योजनाओं में से 188 योजनाएं अभी भी स्वीकृति के लिए लंबित हैं.
महज 86 योजनाओं की ही प्रशासनिक स्वीकृति मिल सकी है.
ये है माननीयों का रिपोर्ट कार्ड
विधायक निधि प्रस्तावित योजना स्वीकृत योजना स्वीकृति राशि खर्च
मदन मोहन तिवारी 2 करोड़ 76 31 1.44 करोड़ शून्य
प्रकाश राय 2 करोड़ 06 00 शून्य शून्य
नारायण प्रसाद 2 करोड़ 17 00 शून्य शून्य
विनय बिहारी 2 करोड़ 01 01 9.40 लाख शून्य
खुर्शीद आलम 2 करोड़ 30 00 शून्य शून्य
विनय वर्मा 2 करोड़ 01 01 9.89 लाख शून्य
राधव शरण पांडेय 2 करोड़ 13 00 शून्य शून्य
भागीरथी देवी 2 करोड़ 71 38 78.94 लाख शून्य
धीरेंद्र प्रताप सिंह 2 करोड़ 24 00 शून्य शून्य
विधान पार्षद निधि प्रस्तावित योजना स्वीकृत योजना स्वीकृति राशि खर्च
राजेश राम 2 करोड़ 25 13 1.06 करोड़ शून्य
केदार पांडेय 40 लाख 10 02 8.45 लाख शून्य
लालबाबू प्रसाद 2 करोड़ शून्य शून्य शून्य शून्य
नोट: सभी आंकड़े अक्तूबर माह तक के हैं.
योजना गिनाने में बेतिया विधायक आगे, लौरिया पीछे
बेतिया के कांग्रेस विधायक दन मोहन तिवारी योजनाओं को गिनाने में सबसे आगे हैं. श्री तिवारी की ओर से कुल 76 योजनाओं की अनुशंसा की गई है. इसमें से 31 स्वीकृत भी हो चुकी है.
योजना की अनुशंसा करने में दूसरे नंबर पर सूबे के गन्ना मंत्री सह सिकटा विधायक खुर्शीद आलम है. इनकी ओर से 30 योजनाओं की अनुशंसा की गई है, हालांकि इनकी एक भी अनुशंसा स्वीकृत नहीं हुई है़ वहीं लौरिया के भाजपा विधायक अनुशंसा करने में सबसे पीछे हैं. इनकी ओर से महज एक ही योजना की अनुशंसा की गई है. विधान पार्षद लाल बाबू प्रसाद की ओर से कोई अनुशंसा नहीं की गई है.
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